एआई शिक्षा क्रांति: धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक, NEP 2020 के अनुरूप स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक होगा AI एकीकरण

भारत में शिक्षा क्रांति! केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एआई पर तीसरी परामर्शी समिति की बैठक की अध्यक्षता की। जानें कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्कूल और कॉलेज की शिक्षा को बना रहा है व्यक्तिगत और समावेशी।

भारत सरकार एआई शिक्षा परामर्शी समिति -भारतीय शिक्षा प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को और गहराई से शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली में शिक्षण और अध्ययन में एआई के उपयोग पर गठित परामर्शी समिति की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक एआई के रूपांतरकारी इस्तेमाल पर विस्तृत रोडमैप पर चर्चा हुई।

बैठक में शिक्षा राज्य मंत्री श्री सुखांत मजूमदार, श्री जयंत चौधरी, विद्यालय शिक्षा सचिव श्री संजय कुमार, उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और समिति के सदस्य उपस्थित थे।

एआई समाधान है बड़ी चुनौतियों का: प्रधान

इस अवसर पर श्री प्रधान ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में शिक्षा के क्षेत्र की कुछ सबसे बड़ी चुनौतियों, खासकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक समावेशी, सुलभ और न्यायसंगत बनाने की दिशा में समाधान प्रस्तुत करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अध्ययन को विद्यार्थी-केंद्रित बनाना, अध्ययन परिणामों में सुधार करना और शिक्षकों व विद्यार्थियों दोनों को सशक्त बनाना है।

स्कूली शिक्षा में एआई एकीकरण: NEP 2020 की राह पर

बैठक में स्कूली शिक्षा में एआई एकीकरण पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप योजनाओं का खाका पेश किया गया। इसमें निम्नलिखित प्रमुख बिंदु शामिल हैं:

· पाठ्यक्रम सुधार: आधारभूत स्तर से ही आयु-उपयुक्त कम्प्यूटेशनल सोच और एआई साक्षरता को पढ़ाना। माध्यमिक स्तर पर एआई को एक कौशल विषय के रूप में पेश किया जाएगा।
· प्रमुख डिजिटल पहल: दीक्षा 2.0 पोर्टल, ई-जादुई पिटारा, गुरु-मित्र (शिक्षक सहायता), तारा ऐप, माई करियर एडवाइजर और विद्या समीक्षा केंद्र जैसे एआई-संचालित टूल्स के माध्यम से व्यक्तिगत शिक्षण, करियर मार्गदर्शन और बहुभाषी पहुंच को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उच्च शिक्षा को बनाना है वैश्विक स्तर का

उच्च शिक्षा पर दूसरी प्रस्तुति में अनुसंधान, नवाचार और रोजगार क्षमता बढ़ाने में एआई की भूमिका को रेखांकित किया गया। इसमें केंद्रीय विश्वविद्यालयों और संस्थानों में एआई-सक्षम पाठ्यक्रमों को अपडेट करने, कौशल-आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने और डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इन उपायों का लक्ष्य भविष्य के लिए तैयार स्नातक तैयार करना और भारत को वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनाना है।

इस बैठक के साथ, भारत स्पष्ट कर रहा है कि वह 21वीं सदी की शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभाने और अपनी युवा पीढ़ी को एआई युग के लिए तैयार करने के लिए दृढ़संकल्पित है।

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Author: ainewsworld

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