भारत सरकार ने देश भर की महिलाओं में तनाव को रोकने, कम करने और प्रबंधित करने के लिए एक व्यापक एवं बहुआयामी रणनीति लागू की है। यह रणनीति मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, सुरक्षा उपाय, कार्यस्थल सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित प्रयासों पर आधारित है।
1. मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच को मजबूत बनाना
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर होते हुए भी, केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम शुरू किए हैं।
· टेली-मानस (Tele-MANAS) का विस्तार: 10 अक्टूबर, 2022 को शुरू हुए राष्ट्रीय टेली मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। 27 नवंबर, 2025 तक 29.82 लाख से अधिक कॉल संभाली जा चुकी हैं। सेवाएं 20 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं और 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 53 टेली मानस प्रकोष्ठ स्थापित किए गए हैं। 2024 में लॉन्च हुए मोबाइल ऐप और वीडियो परामर्श सुविधा ने इसे और सुलभ बनाया है।
· जमीनी स्तर पर सेवाओं का एकीकरण: राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) के तहत, जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP) को देश के 767 जिलों में लागू किया गया है। इसके अलावा, 1.81 लाख से अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में उन्नत किया गया है, जहां अब मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्राथमिक देखभाल का हिस्सा हैं।
· कानूनी सुधार: मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 एक महत्वपूर्ण कदम था। इस अधिनियम ने आत्महत्या के प्रयास को अपराध की श्रेणी से हटा दिया, यह मानते हुए कि गंभीर तनाव में व्यक्ति को दंड के बजाय देखभाल और पुनर्वास की आवश्यकता होती है।
2. महिला सुरक्षा और त्वरित सहायता के तंत्र
सरकार ने यह माना है कि लैंगिक हिंसा और असुरक्षा महिलाओं में मनोवैज्ञानिक आघात का एक प्रमुख कारण है। इसे दूर करने के लिए कई व्यवस्थाएं बनाई गई हैं।
· वन स्टॉप सेंटर (OSC): मिशन शक्ति योजना का यह घटक हिंसा से प्रभावित महिलाओं को चिकित्सा, कानूनी सहायता, अस्थायी आश्रय और मनोसामाजिक परामर्श जैसी एकीकृत सेवाएं एक ही छत के नीचे प्रदान करता है। देश भर में 864 ऐसे केंद्र कार्यरत हैं, जिन्होंने 30 सितंबर, 2025 तक 12.67 लाख से अधिक महिलाओं की सहायता की है।
· आपातकालीन हेल्पलाइन और पुलिस इंटरफेस: महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, महिला हेल्पलाइन-181, बाल हेल्पलाइन-1098 और आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS-112) जैसी सेवाएं संचालित हैं। पुलिस थानों को महिला-अनुकूल बनाने के लिए 14,649 महिला सहायता डेस्क स्थापित किए गए हैं।
· सुरक्षित सार्वजनिक स्थान: सुरक्षित शहर परियोजनाओं के तहत अहमदाबाद, बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई सहित आठ शहरों में सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। रेलवे और सड़क परिवहन में एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और वीडियो निगरानी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
3. कार्यस्थल पर सुरक्षा और समानता
कार्यस्थल पर उत्पीड़न और असुरक्षा से जुड़े तनाव को कम करने के लिए कानूनी और प्रशासनिक ढांचा मजबूत किया गया है।
· श्रम संहिताओं का क्रांतिकारी बदलाव: नवंबर 2025 से लागू हुई चार नई श्रम संहिताओं ने महिलाओं के लिए कार्यस्थल को अधिक सुरक्षित और समावेशी बनाने का लक्ष्य रखा है। इनमें समान कार्य के लिए समान वेतन की गारंटी, रात्रि शिफ्ट में काम की अनुमति (सुरक्षा उपायों के साथ), और मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच जैसे प्रावधान शामिल हैं।
· उत्पीड़न रोकथाम के उपाय: कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए लचीली कार्य व्यवस्था और उत्पीड़न रोकथाम के दिशा-निर्देश जारी करता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा लॉन्च शी-बॉक्स पोर्टल कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करने और ट्रैक करने का एक केंद्रीकृत मंच प्रदान करता है।
4. सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण: दीर्घकालिक समाधान
सरकार ने महिलाओं में तनाव के मूल संरचनात्मक कारणों, जैसे वित्तीय असुरक्षा और सामाजिक भेदभाव, को दूर करने पर भी ध्यान केंद्रित किया है।
· रोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता: स्किल इंडिया और विभिन्न आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं की रोजगार क्षमता और आय सुरक्षा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
· सामाजिक अभियान: बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे प्रमुख अभियान लैंगिक समानता और बालिकाओं की सामाजिक मान्यता को बढ़ावा देकर दीर्घकालिक मनोसामाजिक बोझ को कम करने का प्रयास करते हैं।
· व्यापक स्वास्थ्य अभियान: सितंबर 2025 में शुरू हुए ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से, महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य (शारीरिक एवं मानसिक) और पोषण पर ध्यान दिया जा रहा है।
महिलाओं के मानसिक कल्याण की चुनौती बहुआयामी है और इसके लिए केवल स्वास्थ्य सेवाओं से परे एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है। भारत सरकार द्वारा अपनाया गया यह व्यापक एवं समन्वित मॉडल—जो चिकित्सकीय देखभाल, कानूनी सुरक्षा, कार्यस्थल सुधार और सामाजिक सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ता है—एक सराहनीय कदम है। हालांकि, राज्यों के साथ समन्वय में इन नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी पर ही इस दृष्टिकोण की स्थायी सफलता निर्भर करेगी।
Author: ainewsworld