
वर्ष 2025 संस्कृति के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और उल्लेखनीय वर्ष के रूप में दर्ज हुआ है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ और ‘विकसित भारत’ की भावना को आगे बढ़ाते हुए देश की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए कई यादगार पहलें कीं। काशी से कन्याकुमारी तक और अयोध्या से गंगईकोंडा चोलपुरम तक, मंत्रालय की गतिविधियों ने देशवासियों को जोड़ा और भारत की ‘अनेकता में एकता’ की अवधारणा को मजबूत किया।
सांस्कृतिक समागम से मजबूत हुए रिश्ते
वर्ष की शुरुआत काशी तमिल संगमम 3.0 के भव्य आयोजन के साथ हुई, जो 15 से 24 फरवरी तक वाराणसी में आयोजित हुआ। तमिलनाडु और काशी के सांस्कृतिक रिश्तों को मनाने वाले इस समागम में 869 से अधिक कलाकारों और 190 स्थानीय समूहों ने हिस्सा लिया। लगभग 2 लाख लोगों ने इस कार्यक्रम में भाग लेकर सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया।
वंदे मातरम के 150 वर्ष: राष्ट्रगान में झलकी एकजुटता

7 नवंबर 2025 को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया, जिसकी शोभा माननीय प्रधानमंत्री ने बढ़ाई। इस अवसर पर शुरू की गई विशेष वेबसाइट पर अब तक 1.60 करोड़ से अधिक भारतीयों ने अपना वंदे मातरम गान रिकॉर्ड कर ‘डिजिटल तिरंगा’ में योगदान दिया है।
गणतंत्र दिवस 2025: ‘जयति जय मम भारतम’ ने बनाया विश्व रिकॉर्ड
गणतंत्र दिवस परेड 2025 में पेश की गई ‘जयति जय मम भारतम’ नामक सांस्कृतिक प्रस्तुति ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं। 5,000 से अधिक कलाकारों ने 50 से ज्यादा लोक एवं जनजातीय नृत्य रूपों का शानदार प्रदर्शन कर गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में ‘सबसे बड़े भारतीय लोक विविधता नृत्य’ का खिताब हासिल किया।
प्रयागराज महाकुंभ में ‘कलाग्राम’: परंपरा और कला का अनूठा संगम
प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 के दौरान 10.24 एकड़ में स्थापित ‘कलाग्राम’ एक प्रमुख आकर्षण रहा। 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चले इस आयोजन में देश भर के लगभग 15,000 कलाकारों और कारीगरों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। 635 फुट चौड़े प्रवेश द्वार, 360-डिग्री इमर्सिव अनुभूति मंडप और क्षेत्रीय व्यंजनों के फूड ज़ोन ने करोड़ों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
ऐतिहासिक पल: भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष वापस लाए गए
वर्ष की एक बड़ी उपलब्धि भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की 127 साल बाद भारत वापसी रही। हांगकांग में नीलामी के लिए रखे गए इन अवशेषों को संस्कृति मंत्रालय के कड़े कानूनी हस्तक्षेप के बाद 30 जुलाई 2025 को सफलतापूर्वक भारत लाया गया। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।
यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में भारत की एक और उपलब्धि
भारत के ‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। यह देश की 44वीं संपत्ति है जिसे यह गौरव प्राप्त हुआ, जिससे भारत विश्व स्तर पर छठे और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
स्वतंत्रता दिवस 2025: ‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने पुराने रिकॉर्ड तोड़े

‘नया भारत’ थीम के साथ मनाए गए 79वें स्वतंत्रता दिवस पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने नया कीर्तिमान स्थापित किया। पिछले वर्ष की तुलना में 50% अधिक कवरेज और सेल्फी अपलोड दर्ज किए गए, जबकि व्यय में 15% की कमी आई। 12 अगस्त को दिल्ली के भारत मंडपम से हजारों बाइकर्स की रैली ने उत्सव की शुरुआत की।
ज्ञान भारतम: भारत की पांडुलिपि धरोहर को डिजिटल संरक्षण
‘ज्ञान भारतम’ पहल के तहत देश की पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण और डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। 12 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री द्वारा आधिकारिक वेब पोर्टल लॉन्च किया गया। देश-विदेश के 1,100 से अधिक विशेषज्ञों ने नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण: कंभ रामायण और आदि तिरुवधिराई उत्सव
तमिलनाडु में कंभ रामायण की परंपरा को पुनर्जीवित किया गया, जो श्रीरंगम मंदिर से शुरू होकर राम नवमी पर कंबन मेदु में समापन के साथ अब एक वार्षिक आयोजन बनेगा। इसी तरह, चोल सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम की जयंती और उनके समुद्री अभियान की 1000वीं सालगिरी पर गंगईकोंडा चोलपुरम में पांच दिवसीय भव्य उत्सव मनाया गया।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और भविष्य की पहल
वर्ष के अंत में बोधगया में अंतर्राष्ट्रीय त्रिपिटक जप समारोह (2-13 दिसंबर) और नई दिल्ली में यूनेस्को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर समिति का बीसवाँ सत्र (8-13 दिसंबर) जैसे आयोजनों ने भारत को वैश्विक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया।
संस्कृति मंत्रालय द्वारा वर्ष 2025 में की गई ये पहलें केवल आयोजन मात्र नहीं थीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने, युवाओं से जोड़ने और विश्व पटल पर देश की गौरवशाली पहचान को रेखांकित करने के साधन थे। डिजिटल पहुंच से लेकर विश्व रिकॉर्ड तक, इन उपलब्धियों ने ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक सशक्त आधार तैयार किया है।
Author: ainewsworld