रायसीना डायलॉग में अमेरिका का बड़ा संकेत: भारत के उभार से क्यों परेशान है व्हाइट हाउस ?

अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह भारत को वह व्यापारिक रियायतें नहीं देगा, जो उसने एक समय चीन को दी थीं। जानिए रायसीना डायलॉग में अमेरिकी उप विदेश मंत्री के बयान से जुड़ी पूरी खबर और इसके भू-राजनीतिक मायने।

नई दिल्ली: दुनिया की सबसे पुरानी लोकतंत्र और सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दंभ भरने वाला अमेरिका एक बार फिर अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति पर कायम दिखाई दे रहा है। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ‘रायसीना डायलॉग’ में अमेरिका ने भारत के प्रति अपनी आर्थिक नीतियों को लेकर एक स्पष्ट और सख्त संदेश दिया है। अमेरिका का कहना है कि वह भारत के साथ वह गलती नहीं दोहराना चाहता, जो उसने करीब दो दशक पहले चीन के साथ की थी।

‘ China को दिए गए लाभ भारत को नहीं दोहराएंगे’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी और अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लेंडो ने रायसीना डायलॉग में साफ तौर पर कहा कि अमेरिका भारत को व्यापक आर्थिक लाभ देने के मूड में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 20 साल पहले चीन के साथ जो व्यवहार किया गया था, उसके परिणामस्वरूप चीन आज अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी बन गया है। यही वजह है कि अमेरिका अब भारत के साथ वैसी उदार नीति नहीं अपनाना चाहता।

क्रिस्टोफर लेंडो ने कहा, “भारत को यह समझना चाहिए कि हम वो गलती दोबारा नहीं करने जा रहे हैं, जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थी।” उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका भारत को बाजार विकसित करने में सक्षम बनाएगा, लेकिन इसकी भी पूरी संभावना है कि भारत व्यावसायिक मामलों में अमेरिका से आगे निकल सकता है। इसलिए अमेरिका अब सतर्क रहना चाहता है।

क्यों बढ़ रही है अमेरिका की चिंता?

दरअसल, अमेरिका के लिए सिरदर्द का सबब सिर्फ चीन नहीं है। भारत का तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरना भी अमेरिका की चिंता का कारण बना हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका नहीं चाहता कि भारत भी चीन की तरह उसके आर्थिक वर्चस्व को चुनौती दे। इसी वजह से डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत के खिलाफ ट्रेड और टैरिफ को लेकर कई सख्त कदम उठाए थे।

पार्टनर हैं, लेकिन सीमाओं के साथ’

अमेरिकी उप विदेश मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि भारत आज अमेरिका का एक बड़ा पार्टनर है, लेकिन यह साझेदारी कुछ सीमाओं के साथ है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि अमेरिका अब किसी भी देश को बिना रोक-टोक के अपने बाजार तक पहुंच नहीं बनाने देगा। ट्रंप की नीति ‘पारस्परिकता’ और ‘अमेरिकी राष्ट्रीय हित’ पर आधारित है, जो भविष्य में भारत के साथ संबंधों की दिशा तय करेगी।

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत को लेकर ऐसा बयान दिया हो। बीते साल उन्होंने भारत को ‘डेड इकनॉमी’ (मृत अर्थव्यवस्था) तक कह डाला था। ऐसे में लेंडो का यह बयान ट्रंप प्रशासन की सोच को साफ दर्शाता है कि अमेरिका भारत को चीन की तरह आर्थिक ताकत नहीं बनने देना चाहता।

आगे की राह

भारत के लिए यह संकेत स्पष्ट है कि अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों में अब वह उदारता नहीं देखने को मिलेगी, जो पहले कभी देखी गई थी। भारत को अपनी आर्थिक नीतियों और वैश्विक रणनीतियों को इसी नई वास्तविकता के अनुसार ढालना होगा। रायसीना डायलॉग में दिया गया यह बयान आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।

 

 

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Author: ainewsworld

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