पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भारत का एक्शन: बोला- संवाद ही एकमात्र रास्ता, नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि

पश्चिम एशियाई क्षेत्र (West Asia Conflict) में बढ़ती हिंसा और बिगड़ते हालात के बीच भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है। भारत ने एक बार फिर सभी पक्षों से संघर्ष विराम और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का आह्वान किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस क्षेत्र में जारी संघर्ष का समाधान सिर्फ बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है।

रमजान में भी नहीं रुका खून’

प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बात पर गहरा दुःख व्यक्त किया कि पवित्र महीने रमजान के दौरान भी इस क्षेत्र में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में यह संघर्ष तेज हुआ है और अब यह दूसरे देशों में भी फैल गया है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, “एक निकटवर्ती पड़ोसी देश में ये घटनाक्रम होना हमारे लिए सीधा चिंता का कारण है, क्योंकि इस क्षेत्र की स्थिरता में भारत की अहम भूमिका है।”

एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सबसे ऊपर

विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में रहने वाले लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
श्री जायसवाल ने बताया, “इस क्षेत्र में न सिर्फ हमारे लोग रहते हैं, बल्कि हमारे व्यापार मार्ग और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाएं भी यहीं से होकर गुजरती हैं। किसी भी तरह के बड़े व्यवधान का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।”

व्यापारिक जहाजों पर हमले पर एतराज

भारत ने पश्चिम एशिया के समुद्री रास्तों में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। प्रवक्ता ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में इस तरह के हमलों में कुछ भारतीय नागरिकों की जान भी गई है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत का स्पष्ट मानना है कि नागरिकों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना गलत है।

क्षेत्र के देशों से संपर्क जारी

भारत सरकार इस मामले पर कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने प्रभावित देशों के अपने समकक्षों से बातचीत की है। संघर्ष प्रभावित देशों में स्थित भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास लगातार भारतीय समुदाय के संपर्क में हैं।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि फंसे हुए भारतीयों को हर संभव मदद पहुंचाई जा रही है और दूतावास कांसुलर मदद के लिए हर समय सक्रिय हैं।

फरवरी में भी जता चुका है भारत चिंता

गौरतलब है कि भारत ने 28 फरवरी को ही ईरान और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि वह बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर रखेगी और राष्ट्रीय हित में हर जरूरी कदम उठाएगी।

भारत की यह अपील ऐसे समय में आई है जब अमेरिका, ईरान, रूस, फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश भी इस संघर्ष को रोकने के लिए राजनयिक कोशिशों में जुटे हैं।

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Author: ainewsworld

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