भारत और यूके ने मिलकर AI और 6G टेक्नोलॉजी में दुनिया का भविष्य बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया

भारत और यूके ने मिलकर AI और 6G टेक्नोलॉजी में दुनिया का भविष्य बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया

भारत-यूके के बीच AI और टेलीकॉम सहयोग को नई दिशा

नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण एआई समिट के दौरान भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच तकनीकी सहयोग को लेकर बड़ी प्रगति देखने को मिली। भारत सरकार के संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर और यूनाइटेड किंगडम के एआई एवं ऑनलाइन सुरक्षा के संसदीय अवर सचिव कनिष्क नारायण के बीच एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई।
यह बैठक नई दिल्ली स्थित डाक भवन में हुई, जहां दोनों देशों ने भविष्य की डिजिटल साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया।

2030 रोडमैप और टेक्नोलॉजी सुरक्षा पहल पर फोकस

इस बैठक में भारत-यूके के 2030 रोडमैप और टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी इनिशिएटिव (TSI) के तहत सहयोग की समीक्षा की गई। दोनों देशों ने दूरसंचार, डिजिटल नवाचार और उभरती तकनीकों में साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प लिया।

भारत ने स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को आने वाले समय में टेलीकॉम सेक्टर की रीढ़ माना जा रहा है। भारत की विशाल डिजिटल क्षमता और यूके की रिसर्च विशेषज्ञता मिलकर वैश्विक स्तर पर नए मानक स्थापित कर सकती है।

6G, Open RAN और AI नेटवर्क पर विशेष जोर

बैठक में निम्न प्रमुख क्षेत्रों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी:

AI-आधारित टेलीकॉम नेटवर्क
Open RAN तकनीक
6G विकास और मानकीकरण
स्पेक्ट्रम इनोवेशन

नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (Satellite Communication)

दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि AI-नेटिव नेटवर्क्स भविष्य की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदल सकते हैं।

साइबर सुरक्षा और क्वांटम टेक्नोलॉजी में नई संभावनाएं

चर्चा के दौरान AI-चालित साइबर सुरक्षा को लेकर भी अहम विचार-विमर्श हुआ। बढ़ते डिजिटल खतरों को देखते हुए सुरक्षित नेटवर्क और डेटा सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई गई।
भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का भी उल्लेख किया गया, जिसमें क्वांटम कम्युनिकेशन और सुरक्षित नेटवर्किंग में अपार संभावनाएं हैं।

वैश्विक मंचों पर संयुक्त भागीदारी

भारत और यूके ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए भी सहमति जताई। इसमें प्रमुख संगठन शामिल हैं:
International Telecommunication Union (ITU)
3rd Generation Partnership Project (3GPP)
इन मंचों पर संयुक्त भागीदारी से वैश्विक टेलीकॉम मानकों को प्रभावित करने की दिशा में दोनों देश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

वैश्विक प्रभाव: अमेरिका, यूरोप और एशिया पर पड़ेगा असर

भारत-यूके की यह साझेदारी केवल द्विपक्षीय नहीं बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को प्रभावित करने वाली है। इसका असर अमेरिका, यूरोप, रूस, चीन और मध्य-पूर्व के देशों तक देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग AI, 6G और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नई वैश्विक प्रतिस्पर्धा को जन्म देगा।

निष्कर्ष

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच बढ़ता तकनीकी सहयोग आने वाले वर्षों में डिजिटल दुनिया का स्वरूप बदल सकता है। AI, क्वांटम और 6G जैसी तकनीकों में संयुक्त प्रयास न केवल दोनों देशों को मजबूत बनाएंगे, बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी विकास को भी नई दिशा देंगे।

 

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Author: ainewsworld

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