CBSE 10th Exam 2025-26: दूसरी बोर्ड परीक्षा के लिए बड़ा अपडेट! पहली परीक्षा में यह गलती पड़ेगी भारी, जानें नए नियम

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2025-2026 से लागू होने वाली 10वीं कक्षा की नई बोर्ड परीक्षा योजना को लेकर सभी असमंजसों को दूर कर दिया है। बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि दूसरी बोर्ड परीक्षा केवल विशेष श्रेणियों के छात्रों के लिए होगी और पहली परीक्षा में शामिल होना सभी के लिए अनिवार्य है। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक चिकित्सीय या व्यक्तिगत कारणों से पहली परीक्षा से वंचित रह जाने की स्थिति में दूसरी परीक्षा की पात्रता को लेकर उत्सुक थे।

क्या है सीबीएसई की नई परीक्षा योजना?

सीबीएसई ने इस वर्ष से 10वीं कक्षा के लिए दो चरणों में बोर्ड परीक्षा आयोजित करने का नियम बनाया है। पहली परीक्षा फरवरी-मार्च में और दूसरी परीक्षा मई-जून के आसपास आयोजित होगी। हालांकि, इस दूसरी परीक्षा को लेकर छात्रों में कई तरह की भ्रांतियां थीं, जिन्हें अब बोर्ड ने साफ कर दिया है।

पहली परीक्षा में अनुपस्थिति: क्या होगा नियम?

बोर्ड के नए आदेश के अनुसार, पहली बोर्ड परीक्षा में उपस्थित होना प्रत्येक पंजीकृत छात्र के लिए अनिवार्य है। यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में तीन या उससे अधिक विषयों में अनुपस्थित रहता है, तो उसे दूसरी परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

ऐसे छात्रों को सीधे “अनिवार्य पुनरावृत्ति” (Compulsory Repeat) श्रेणी में डाल दिया जाएगा। इसका मतलब है कि उन्हें अगले शैक्षणिक सत्र का इंतजार करना होगा और वे अगले वर्ष फरवरी में होने वाली मुख्य बोर्ड परीक्षाओं में ही शामिल हो सकेंगे। यह नियम उन छात्रों के लिए कड़ी चेतावनी है जो परीक्षा को हल्के में लेने की सोच रहे हैं।

दूसरी परीक्षा कौन दे सकता है? (पात्रता मानदंड)

सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि दूसरी बोर्ड परीक्षा मुख्य रूप से तीन श्रेणियों के छात्रों के लिए बनाई गई है:

1. सुधार श्रेणी (Improvement Category):
जो छात्र पहली परीक्षा में उत्तीर्ण हो चुके हैं लेकिन अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं, वे इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। ऐसे छात्र अधिकतम तीन मुख्य विषयों – विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषाओं – में दूसरी परीक्षा देकर अपने प्रदर्शन को बेहतर कर सकते हैं। पहली और दूसरी परीक्षा में से जो अधिक अंक होंगे, वे अंतिम परिणाम में शामिल किए जाएंगे।

2. कम्पार्टमेंट श्रेणी (Compartment Category):
पहली परीक्षा के परिणाम में यदि कोई छात्र किसी एक विषय में अनुत्तीर्ण (फेल) हो जाता है, तो वह कम्पार्टमेंट परीक्षा के रूप में दूसरी परीक्षा में शामिल हो सकता है। इस विषय को पास करने के बाद उसे उत्तीर्ण प्रमाण पत्र दे दिया जाएगा।

3. विषय परिवर्तन श्रेणी (Subject Change Category):
एक और महत्वपूर्ण श्रेणी उन छात्रों की है जो पहली परीक्षा में तो उत्तीर्ण हो गए हैं, लेकिन अब वे अपना एक विषय बदलना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी छात्र ने सामाजिक विज्ञान की जगह कला या कोई अन्य वैकल्पिक विषय लेना है, तो वह दूसरी परीक्षा में नए विषय के साथ शामिल हो सकता है। यह सुविधा उन्हें दी जाएगी जो अपने समग्र परिणाम या भविष्य की पढ़ाई के लिए विषय संयोजन बदलना चाहते हैं।

छात्रों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

सीबीएसई के इस स्पष्टीकरण के बाद अब यह तय हो गया है कि पहली परीक्षा को नजरअंदाज करना या उसमें जानबूझकर अनुपस्थित रहना छात्रों के लिए भारी पड़ सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस नियम का मकसद छात्रों पर बोझ कम करना है, न कि उन्हें परीक्षा से भागने का मौका देना।

बोर्ड ने स्कूल प्रमुखों को भी निर्देश दिया है कि वे छात्रों और अभिभावकों को नई परीक्षा योजना और पात्रता नियमों के बारे में विस्तार से जागरूक करें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

अधिक जानकारी और आधिकारिक अधिसूचना के लिए छात्र सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर विजिट कर सकते हैं।

आगे की स्क्रिप्ट (अंतरराष्ट्रीय पाठकों के लिए संदर्भ)

यह खबर सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूके, कनाडा और खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी बेहद अहम है, जिनके बच्चे सीबीएसई स्कूलों में पढ़ते हैं। यूक्रेन-रूस जैसे देशों में फंसे या वहां से लौटे छात्रों के लिए भी यह स्पष्टीकरण राहत लेकर आया है, क्योंकि अब वे अपनी स्थिति के अनुसार दूसरी परीक्षा की योजना बना सकते हैं।

ainewsworld
Author: ainewsworld

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज