जिनेवा में अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता का दूसरा दौर: ‘मार्गदर्शक सिद्धांतों’ पर सहमति, फिर भी बरकरार है तनाव

अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता का दूसरा दौर: जिनेवा में बनी सहमति, युद्धपोतों से बढ़ा तनाव

ईरान और अमेरिका के बीच जिनेवा में परमाणु वार्ता का दूसरा दौर संपन्न। मुख्य सिद्धांतों पर सहमति, लेकिन अमेरिकी युद्धपोत की तैनाती और खामेनी की चेतावनी से बढ़ी तनातनी। पढ़िए पूरी Update.

जिनेवा/तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता का दूसरा दौर मंगलवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संपन्न हुआ। ओमान की मध्यस्थता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों पक्ष कुछ प्रमुख मार्गदर्शक सिद्धांतों (गाइडिंग प्रिंसिपल्स) पर सहमत हो गए हैं। हालाँकि, अमेरिका द्वारा क्षेत्र में एक और विशाल युद्धपोत भेजने और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनी की कड़ी चेतावनी के बीच यह कूटनीतिक प्रयास जारी है ।

वार्ता में प्रगति, लेकिन समझौता दूर

वार्ता के बाद मीडिया से बात करते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत का माहौल पिछले दौर की तुलना में अधिक रचनात्मक रहा। उन्होंने पुष्टि की कि “मार्गदर्शक सिद्धांतों” के एक सेट पर सामान्य सहमति बन गई है, जो एक संभावित समझौते का आधार तैयार करेगा ।

अराघची ने कहा, “यह तय हुआ है कि दोनों पक्ष एक संभावित समझौते के मसौदे (ड्राफ्ट) पर काम करेंगे और उनका आदान-प्रदान करेंगे।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रगति का मतलब यह नहीं है कि कोई समझौता आसन्न है। “दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख हैं, जिन्हें करीब लाने में अभी समय लगेगा,” उन्होंने आगे कहा ।

वार्ता के तीसरे दौर की अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है। ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार, दोनों देश पहले मसौदे तैयार करेंगे और उनका आदान-प्रदान करेंगे, उसके बाद ही अगली बैठक की संभावित तारीख पर सहमति बनेगी । सूत्रों के अनुसार, इस दौर की वार्ता में मुख्य रूप से तकनीकी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें परमाणु, कानूनी और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ शामिल हुए ।

ट्रंप का बयान और सैन्य तनाव

वार्ता शुरू होने से पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि वह इन वार्ताओं में “अप्रत्यक्ष रूप से” शामिल होंगे और उन्हें विश्वास है कि ईरान एक समझौता करना चाहता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो ईरान को “परिणाम” भुगतने होंगे ।

इन बयानों के बीच तनाव को और बढ़ाते हुए, अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोत यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड को मध्य पूर्व में तैनात कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विशाल युद्धपोत आने वाले हफ्तों में क्षेत्र में पहुंच सकता है, जहां पहले से ही यूएसएस अब्राहम लिंकन मौजूद है । अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर बातचीत विफल होती है तो सेना संभावित सैन्य अभियान के लिए तैयार है ।

खामेनी की कड़ी चेतावनी और ईरान का रुख

वार्ता के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनी ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार को हटाने के अमेरिकी प्रयास विफल हो जाएंगे। खामेनी ने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति कहते हैं कि उनकी सेना दुनिया की सबसे ताकतवर है, लेकिन कभी-कभी दुनिया की सबसे ताकतवर सेना को भी ऐसा तमाचा पड़ता है कि वह उठ नहीं पाती” ।

ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वार्ता में उसकी मुख्य मांगों में सभी प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना और उसके परमाणु कार्यक्रम पर विश्वास बहाली के उपायों पर चर्चा शामिल है । ईरान ने परमाणु मुद्दे के अलावा अपनी मिसाइल क्षमता पर बातचीत करने से साफ इनकार किया है, जबकि अमेरिका वार्ता के दायरे को बढ़ाना चाहता है ।

क्षेत्र में बढ़ती आर्थिक और सैन्य सतर्कता

इस राजनयिक और सैन्य गतिरोध के बीच, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य अभ्यास किया, जो दुनिया का एक प्रमुख तेल व्यापार मार्ग है। ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले की स्थिति में वह इस मार्ग को बंद कर सकता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ सकता है । बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया क्योंकि निवेशक आपूर्ति बाधित होने के जोखिम का आकलन कर रहे हैं ।

जानकारों का मानना है कि हालांकि दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आ गए हैं और सैद्धांतिक सहमति बनी है, लेकिन आपसी अविश्वास और क्षेत्र में बढ़ता सैन्य दबाव किसी भी अंतिम समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों देश अपने-अपने मसौदे कैसे तैयार करते हैं और क्या वे अगले दौर की वार्ता के लिए कोई ठोस एजेंडा बना पाते हैं।

ainewsworld
Author: ainewsworld

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज