
दिल्ली/ढाका: दक्षिण एशिया की राजनीति में बुधवार को उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया, जब बांग्लादेश के आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने जबरदस्त जीत दर्ज कर ली। सत्ता विरोधी लहर पर सवार होकर बीएनपी ने न सिर्फ बहुमत हासिल किया, बल्कि संसद में दो-तिहाई बहुमत (टू-थर्ड मेजॉरिटी) के आंकड़े को भी पार कर लिया। इस शानदार जीत के साथ ही बीएनपी ने ढाका की सत्ता पर मजबूत पकड़ बना ली है।
इस चुनावी नतीजे ने पड़ोसी देश भारत की धड़कनों को भी तेज कर दिया है। पारंपरिक रूप से भारत के करीबी रहे बांग्लादेश में अब नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान से बात की और उन्हें इस ऐतिहासिक जीत की बधाई दी। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, यह कॉल न सिर्फ शिष्टाचार थी, बल्कि भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति को मजबूत करने का एक सशक्त संकेत था।
तारिक रहमान को पीएम मोदी का खास अंदाज में संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीएनपी प्रमुख से फोन पर बातचीत के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस जानकारी को साझा किया। अपने पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, “बांग्लादेश में हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में शानदार जीत के लिए बीएनपी अध्यक्ष महोदय तारिक रहमान को हार्दिक बधाई।”
उन्होंने आगे लिखा, “बांग्लादेश की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के उनके प्रयासों में भारत हमेशा उनके साथ खड़ा है। दो घनिष्ठ पड़ोसी देशों के रूप में, हम अपने लोगों की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।”
प्रधानमंत्री मोदी के इस ट्वीट को खूब सराहा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह एक संदेश है कि भारत किसी भी सरकार के साथ मिलकर काम करने को तैयार है, जो बांग्लादेश की जनता ने चुनी है।
बीएनपी की जीत से बदलेगा समीकरण?
बीएनपी की यह जीत सिर्फ एक चुनावी नतीजा नहीं है, बल्कि इसे बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय बाद किसी पार्टी को इतने बड़े जनादेश के साथ सत्ता मिली है। विश्लेषकों का मानना है कि बीएनपी के नेतृत्व में ढाका की विदेश नीति में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं, लेकिन पीएम मोदी की इस त्वरित पहल ने यह साबित कर दिया है कि भारत कूटनीतिक रूप से कितना सतर्क और सक्रिय है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी छाई बीएनपी की जीत
बीएनपी की इस जीत की गूंज सिर्फ भारत-बांग्लादेश सीमा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वाशिंगटन से लेकर मॉस्को और लंदन तक इस पर चर्चा हो रही है। अमेरिका ने भी बांग्लादेश में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से हुए चुनाव की प्रशंसा की है। वहीं, रूस और यूक्रेन जैसे देशों में बसे बांग्लादेशी मूल के लोग और राजनयिक भी इस नई सरकार के गठन पर नजरें गड़ाए हुए हैं।
प्रवासी भारतीयों (NRI) के लिए यह खबर इसलिए भी अहम है, क्योंकि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सीधे तौर पर पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी को प्रभावित करते हैं। व्यापारिक जगतों को उम्मीद है कि बीएनपी के नेतृत्व में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को और बढ़ावा मिलेगा।
क्या है आगे की राह?
तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी अब सरकार गठन की तैयारी में जुट गई है। प्रधानमंत्री मोदी के इस बधाई संदेश ने दोनों देशों के बीच एक सकारात्मक शुरुआत कर दी है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि ढाका में नई सरकार कब शपथ लेती है और क्षेत्रीय सहयोग के मोर्चे पर क्या नई पहल होती है।
यह चुनावी जीत न सिर्फ बीएनपी के लिए बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लोकतंत्र के लिए एक मिसाल है, और भारत ने एक सशक्त पड़ोसी की तरह इस नए अध्याय की शुरुआत में अपनी दोस्ताना उपस्थिति दर्ज करा दी है।
Author: ainewsworld