बांग्लादेश आम चुनाव 2026 में बीएनपी गठबंधन ने 212 सीटें जीतकर सत्ता में शानदार वापसी की है। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली इस जीत पर पीएम मोदी ने दी बधाई
ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। शेख हसीना के बाद के युग में हुए पहले आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने प्रचंड बहुमत हासिल करके सत्ता में शानदार वापसी की है। बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान अब देश के अगले प्रधानमंत्री बनने की ओर अग्रसर हैं, जिससे लगभग सवा दशक बाद किसी पुरुष नेता के हाथों में देश की कमान आएगी । इस ऐतिहासिक जीत पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी है, जिससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच रिश्तों की एक नई शुरुआत के संकेत मिलते हैं ।
चुनावी नतीजे: बीएनपी को दो-तिहाई बहुमत
बांग्लादेश चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 300 सदस्यीय संसद के लिए हुए मतदान में बीएनपी और उसके सहयोगी दलों ने शानदार प्रदर्शन किया। बीएनपी ने अकेले दम पर 209 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उसके सहयोगी दल – गणसंहिता आंदोलन, बांग्लादेश जातीय पार्टी और गण अधिकार परिषद ने एक-एक सीट जीती। इस प्रकार बीएनपी गठबंधन का कुल आंकड़ा 212 सीटों तक पहुंच गया, जो बहुमत के आंकड़े (151) से काफी ऊपर है ।
वहीं दूसरी ओर, बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी दल 77 सीटों पर सिमट गए। चुनाव आयोग के अधिकारी अख्तर अहमद ने बताया कि तीन सीटों पर मतदान स्थगित कर दिया गया था। उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को इस चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई थी, जो 2024 के जनविद्रोह के बाद का पहला आम चुनाव था ।
तारिक रहमान: वनवास के बाद वापसी
बीएनपी की इस जीत के सूत्रधार माने जा रहे तारिक रहमान, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और बीएनपी के संस्थापक जियाउर रहमान के पुत्र हैं। लंबे समय तक निर्वासन में रहने के बाद पिछले साल दिसंबर में वे स्वदेश लौटे थे। ढाका-17 और बोगरा-6 दोनों सीटों से जीत दर्ज करके उन्होंने अपनी मजबूत लोकप्रियता का परिचय दिया है। वोट डालने के बाद उन्होंने कहा था, “बांग्लादेश की जनता इस पल का एक दशक से इंतजार कर रही थी।”
जनमत संग्रह में सुधारों को मिला समर्थन
संसदीय चुनावों के साथ ही हुए राष्ट्रीय जनमत संग्रह में भी भारी मतदान हुआ। करीब 60.26 प्रतिशत मतदान के साथ प्रस्तावित संवैधानिक सुधारों को स्पष्ट बहुमत मिला। इस ‘जुलाई चार्टर’ में प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा तय करना, न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना और महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने जैसे प्रावधान शामिल हैं ।
पीएम मोदी ने दी बधाई, रिश्तों को मजबूत करने पर जोर
बांग्लादेश में इस ऐतिहासिक बदलाव पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तारिक रहमान को बधाई देते हुए कहा, “बांग्लादेश की जनता का यह विश्वास आपके नेतृत्व को मिला सम्मान है।” उन्होंने आगे कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा। पीएम मोदी ने बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करने और साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने की इच्छा जताई ।
यह बधाई ऐसे समय में आई है जब भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में नई गर्माहट देखी जा रही है। शेख हसीना के निधन और अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद, भारत ने बीएनपी नेतृत्व से संपर्क बढ़ा दिया था। विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा तारिक रहमान को भेजा गया पीएम मोदी का पत्र और खालिदा जिया के इलाज में मदद की पेशकश ने इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ।
भू-राजनीतिक समीकरण: चीन और अमेरिका की नज़रें
बांग्लादेश चुनाव पर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नज़रें टिकी हुई थीं। विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव नतीजे से बांग्लादेश के विदेश नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। शेख हसीना के कार्यकाल में भारत के करीब रहने वाला बांग्लादेश अब चीन और मुस्लिम देशों की ओर रुख कर सकता है । बीएनपी का मेनिफेस्टो भारत के साथ नदी के जल बंटवारे को लेकर नए सिरे से बातचीत की बात करता है, जबकि जमात-ए-इस्लामी भारत को दिए गए “विशेष अधिकार” वापस लेने की बात कह चुकी है ।
हालांकि, तारिक रहमान ने हाल के महीनों में भारत के प्रति नरम रुख अपनाया है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि वे अमेरिका और चीन दोनों के साथ संतुलित संबंध रखेंगे। अमेरिकी राजदूत ब्रेंट क्रिस्टेंसन ने भी साफ किया है कि अमेरिका बांग्लादेश की जनता द्वारा चुनी गई सरकार के साथ काम करेगा, लेकिन चीन के बढ़ते प्रभाव पर चिंता भी जताई है ।
भारत के लिए क्या मायने रखता है यह चुनाव?
तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार के सामने भारत कई अहम मुद्दों को लेकर चर्चा करना चाहेगा। इनमें सुरक्षा सहयोग सबसे ऊपर है ताकि पूर्वोत्तर भारत में आतंकवादी गतिविधियों के लिए बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल न हो । वहीं, बांग्लादेश में 13 मिलियन से अधिक हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा भी भारत की प्राथमिक सूची में होगी। चुनाव प्रचार के दौरान हुए हिंसा में कम से कम 16 हिंदुओं की मौत की खबरें सामने आई थीं, जिस पर संयुक्त राष्ट्र ने भी चिंता जताई थी ।
सबसे बड़ी चुनौती शेख हसीना का मुद्दा हो सकता है। ढाका में अंतरिम सरकार और बीएनपी के समर्थक हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहे हैं, जिन्हें 2024 के विद्रोह के दौरान कथित अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई गई है और वे भारत में शरण लिए हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक भारत इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाता, उसे बांग्लादेश में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में नहीं देखा जाएगा ।
फिलहाल, बीएनपी ने जश्न से बाज़ आने की अपील की है और पार्टी कार्यकर्ताओं से मस्जिदों, मंदिरों और चर्चों में देश की एकता और शांति के लिए प्रार्थना करने को कहा है । आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल के गठन और नई सरकार की नीतियों पर पूरी दुनिया की नज़रें टिकी रहेंगी।
Author: ainewsworld