नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने मंगलवार को ब्रिक्स (BRICS) 2026 के शेरपाओं और विभिन्न सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक एवं परामर्श सत्र का नेतृत्व किया। यह चर्चा आगामी ब्रिक्स 2026 के एजेंडा और प्राथमिकताओं को तैयार करने की दिशा में एक सार्थक कदम मानी जा रही है।
20 वर्षों का सफर: ब्रिक्स बना अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रमुख मंच
इस अवसर पर एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से डॉ. जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स समूह ने अपने गठन के 20 वर्ष पूरे कर लिए हैं और यह संगठन अंतरराष्ट्रीय सहयोग, परामर्श और समन्वय के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच के रूप में स्थापित हो चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स लगातार एक जन-केंद्रित एजेंडा (People-Centric Agenda) को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका उद्देश्य सामान्य नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।
2026 की प्राथमिकताएं: लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता
विदेश मंत्री ने बताया कि ब्रिक्स 2026 की प्रमुख प्राथमिकताओं पर इस बैठक में व्यापक चर्चा हुई। इन प्राथमिकताओं में लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation) और स्थिरता (Sustainability) शामिल हैं। डॉ. जयशंकर ने विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों द्वारा प्रस्तुत किए गए मूल्यवान सुझावों और नए दृष्टिकोणों की सराहना की और कहा कि इन विचारों से 2026 के एजेंडे को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा, “हम ब्रिक्स 2026 की इन प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों के सुझाव इस साझा यात्रा में बेहद महत्वपूर्ण हैं।”
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भविष्य की राह
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। ब्रिक्स के सदस्य देशों – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका – के साथ-साथ अन्य सहयोगी राष्ट्र एक बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) के निर्माण और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए समन्वित प्रयासों पर चर्चा कर रहे हैं।
इस चर्चा का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका, फ्रांस, जापान, यूक्रेन, रूस सहित दुनिया के अन्य प्रमुख देशों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इसकी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। विश्लेषकों का मानना है कि ब्रिक्स 2026 का एजेंडा वैश्विक शासन, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर नई दिशा तय कर सकता है।
निष्कर्ष
विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर की यह पहल भारत की सक्रिय और रचनात्मक विदेश नीति को दर्शाती है, जो वैश्विक मुद्दों पर सहयोग और संवाद को बढ़ावा देती है। ब्रिक्स 2026 के लिए की जा रही यह तैयारी न केवल समूह के भविष्य के लिए, बल्कि एक न्यायसंगत और समावेशी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब अगले चरणों और ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन पर टिकी हुई हैं।
Author: ainewsworld