भारत और सेशेल्स ने रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने का संकल्य लिया। भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और सेशेल्स राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी की वार्ता ने हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खोले।
नई दिल्ली, १० फरवरी २०२६ – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में सेशेल्स गणराज्य के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी का औपचारिक स्वागत किया। इस दौरान दोनों देशों के बीच संधारणीय विकास, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि “संधारणीयता, आर्थिक विकास और सुरक्षा के प्रति भारत और सेशेल्स की संयुक्त दृष्टि, आगामी वर्षों में सहयोग का मजबूत आधार बनेगी।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को कमजोर नहीं, बल्कि समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप सुधारा जाना चाहिए।
रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख बिंदु
· हिंद महासागर सुरक्षा: दोनों देशों ने समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
· संधारणीय विकास: जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और नीली अर्थव्यवस्था (ब्लू इकॉनमी) को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त पहलों पर चर्चा हुई।
· आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग: पर्यटन, मत्स्य पालन, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत के निवेश और तकनीकी जानकारी साझा करने की संभावनाएं तलाशी गईं।
· सांस्कृतिक संबंध: लोगों-से-लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करने और शैक्षणिक आदान-प्रदान बढ़ाने पर सहमति बनी।
वैश्विक संदर्भ में महत्व
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कूटनीतिक साझेदारी मजबूत कर रहा है। इसी सप्ताह की शुरुआत में, राष्ट्रपति मुर्मु ने यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व का स्वागत करते हुए कहा था कि “भारत-यूरोपीय संघ संबंधों का भविष्य बहुत होनहार है”। सेशेल्स के साथ यह वार्ता भारत की ‘सागर’ (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) नीति के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देना है।
दोनों देशों के लिए लाभ
· भारत के लिए: हिंद महासागर के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में एक विश्वसनीय साझेदार का समर्थन, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करना।
· सेसेल्स के लिए: विकास परियोजनाओं के लिए निवेश, जलवायु परिवर्तन से निपटने में तकनीकी सहयोग और समुद्री संसाधनों के संधारणीय दोहन में मदद।
भारत-यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में हुई वार्ताओं की तरह, जहाँ समृद्धि, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग के स्तंभों पर जोर दिया गया था, वही दृष्टिकोण सेशेल्स के साथ संबंधों में भी दिख रहा है। इससे स्पष्ट है कि भारत लोकतंत्र, बहुलवाद और खुले बाजार जैसे साझा मूल्यों वाले देशों के साथ मिलकर काम करने को प्राथमिकता दे रहा है।
आगे की राह
राष्ट्रपति हर्मिनी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच मजबूत ऐतिहासिक संबंधों पर एक नई मंजिल की शुरुआत है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की साझेदारी न केवल भारत और सेशेल्स, बल्कि पूरे क्षेत्र के हित में होगी।
Author: ainewsworld