भारत-सेशेल्स ने सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की; उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी से की मुलाकात

समुद्री सुरक्षा से लेकर डिजिटलीकरण तक: भारत और सेशेल्स ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर की चर्चा

नई दिल्ली: भारत और हिंद महासागर क्षेत्र के प्रमुख द्वीपीय राष्ट्र सेशेल्स के बीच सहयोग के नए आयाम खुलने की उम्मीद जगी है। भारत के उपराष्ट्रपति, सी पी राधाकृष्णन ने बुधवार को नई दिल्ली में सेशेल्स के राष्ट्रपति, डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक आयोजित की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, चिकित्सा पर्यटन, उच्च शिक्षा, आतिथ्य और डिजिटलीकरण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को गहरा करने के तरीकों पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक का मुख्य फोकस

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बताया कि यह चर्चा द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख पहलुओं पर केंद्रित रही। दोनों पक्षों ने हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि यह वर्ष भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने का है, जिससे इस बैठक का महत्व और बढ़ जाता है।

हिंद महासागर में साझा हित और सुरक्षा

भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” नीति और “सागर” (Security and Growth for All in the Region) दृष्टिकोण के तहत, सेशेल्स एक महत्वपूर्ण सहयोगी रहा है। समुद्री सुरक्षा पर चर्चा विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि हिंद महासागर में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और समुद्री डकैती जैसी चुनौतियों से निपटने में दोनों देशों के हित साझा हैं। भारत पहले भी सेशेल्स को तटीय निगरानी और क्षमता निर्माण में सहायता प्रदान करता रहा है।

आर्थिक और विकास सहयोग के नए क्षेत्र

चर्चा के अन्य प्रमुख बिंदुओं में शामिल हैं:

· नवीकरणीय ऊर्जा: सौर और पवन ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत की विशेषज्ञता सेशेल्स को लाभान्वित कर सकती है, जो ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों पर काम कर रहा है।
· चिकित्सा क्षेत्र: भारत के स्वास्थ्य सेवा उद्योग और चिकित्सा पर्यटन के अनुभव से सेशेल्स के नागरिकों को लाभ मिल सकता है। दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में भी सहयोग की गुंजाइश है।
· उच्च शिक्षा और कौशल विकास: भारतीय शैक्षणिक संस्थानों के साथ जुड़ाव और आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) जैसे क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण पर सहमति बनी।
· डिजिटलीकरण: भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के सफल मॉडल, जैसे UPI और आधार, पर भी सेशेल्स की रुचि हो सकती है, जिससे उसका डिजिटल परिवर्तन तेज हो।

अंतरराष्ट्रीय महत्व

यह बैठक न केवल भारत-सेशेल्स संबंधों, बल्कि भारत की अफ्रीका और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) के प्रति वचनबद्धता को दर्शाती है। अमेरिका, यूक्रेन, रूस सहित वैश्विक समुदाय हिंद महासागर के रणनीतिक महत्व को समझता है। ऐसे में भारत का सेशेल्स जैसे देशों के साथ मजबूत सहयोग क्षेत्रीय संतुलन और विकास के लिए अहम माना जा रहा है।

आगे की राह

माना जा रहा है कि इस उच्च-स्तरीय वार्ता के बाद आने वाले महीनों में विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त कार्यदल बैठकें और समझौतों पर काम तेज होगा। दोनों देशों के बीच 50 वर्षों का यह सफर आत्मीयता और विश्वास से भरा रहा है, और भविष्य में यह साझेदारी और गहरी होती दिख रही है।

(समापन)

यह समाचार द्विपक्षीय संबंधों पर आधारित है।

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Author: ainewsworld

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