भारत का क्वांटम सपना अमरावती से उड़ान भरेगा: अमरावती क्वांटम वैली का शिलान्यास

अमरावती, आंध्र प्रदेश: भारत ने अपनी तकनीकी संप्रभुता और अगली औद्योगिक क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती में ‘अमरावती क्वांटम वैली’ की आधारशिला रखी है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे “भारत के क्वांटम भविष्य की आधारशिला” बताते हुए घोषणा की कि यह पहल देश को क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेता बनाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।
क्यों है अमरावती क्वांटम वैली इतनी महत्वपूर्ण?
क्वांटम प्रौद्योगिकी को अब एक विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और तकनीकी संप्रभुता के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता बताते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के पास इस क्षेत्र में नेतृत्व करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह परियोजना राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है।
क्या हुआ कार्यक्रम में?
शिलान्यास समारोह में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय राज्य मंत्री नारा लोकेश और देश के शीर्ष वैज्ञानिकों व उद्योग जगत के नेताओं ने भाग लिया। इस दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएं हुईं:
· आईबीएम और टीसीएस क्वांटम क्लाउड सेवाओं का शुभारंभ।
· आईबीएम-टीसीएस क्वांटम इनोवेशन सेंटर की स्थापना।
· क्वांटम टैलेंट हब बनाने की घोषणा।
· नौ उद्योग भागीदारों के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान।
यह पहल उद्योग-शैक्षणिक-सरकारी साझेदारी (ट्रिपल हेलिक्स मॉडल) का एक आदर्श उदाहरण है।
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन: महत्वाकांक्षी लक्ष्य
डॉ. सिंह ने बताया कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास एक समर्पित क्वांटम मिशन है। इसके तहत 43 संस्थानों के नेटवर्क के जरिए चार प्रमुख क्षेत्रों – क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसिंग और क्वांटम मैटेरियल्स – पर काम किया जाएगा। मिशन के प्रमुख लक्ष्य हैं:
· 8 वर्षों के भीतर 1,000 क्यूबिट वाले क्वांटम कंप्यूटर का विकास।
· 2,000 किलोमीटर तक के अंतर-शहर क्वांटम संचार नेटवर्क की स्थापना।
· देश में क्वांटम-सेफ संचार ढांचा तैयार करना।
सुरक्षा से स्वास्थ्य तक: क्वांटम तकनीक का व्यापक प्रभाव
मंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए क्वांटम प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक फायदे समझाए:
· साइबर सुरक्षा: क्वांटम एन्क्रिप्शन डेटा को लगभग अभेद्य बना देगा, जिससे रक्षा और वित्तीय क्षेत्र को अभूतपूर्व सुरक्षा मिलेगी।
· स्वास्थ्य सेवा: ट्यूमर के लिए अत्यधिक सटीक विकिरण चिकित्सा संभव होगी, जिससे रोगी की रिकवरी तेज होगी।
· संचार: उपग्रह संचार और सेंसिंग क्षमताओं में क्रांतिकारी सुधार आएगा।
“डबल इंजन” सरकार की सफलता: विशाखापत्तनम उदाहरण
डॉ. सिंह ने केंद्र और आंध्र प्रदेश सरकार के बीच सहयोग को “डबल इंजन” की सफलता बताई। उन्होंने विशाखापत्तनम के राष्ट्रीय महासागर विज्ञान केंद्र का उदाहरण दिया, जो 2006 में शुरू होकर 18 साल तक अधूरा पड़ा था, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार के सत्ता में आने के कुछ ही महीनों में पूरा हो गया। यह केंद्र भारत की नीली अर्थव्यवस्था और गहरे सागर मिशन को मजबूती देगा।
भविष्य की तैयारी: शिक्षा और शोध
भारत ने सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति में देरी से प्रवेश किया था, लेकिन डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि क्वांटम, एआई, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में यह देरी दोहराई नहीं जाएगी। देश में पहले ही क्वांटम में बी.टेक माइनर कोर्स शुरू हो चुके हैं और एम.टेक कार्यक्रमों को भी शामिल किया जा रहा है। अमरावती क्वांटम वैली के साथ प्रशिक्षित शिक्षकों और संरचित अकादमिक कार्यक्रमों पर भी जोर दिया जाएगा।
निष्कर्ष: एकीकृत प्रयास से मिलेगी सफलता
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अलग-थलग काम करने का समय अब खत्म हो गया है। अमरावती क्वांटम वैली की सफलता सरकार, उद्योग, शिक्षा और स्टार्टअप्स को एक मंच पर लाने में निहित है। उन्होंने अंतरिक्ष और परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी खोलने के सफल उदाहरण दिए, जिससे भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 8 अरब डॉलर से बढ़कर आने वाले वर्षों में 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
उन्होंने घोषणा की कि भारत की क्वांटम यात्रा का पहला पड़ाव अमरावती है और यह राज्य ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में एक आधारशिला साबित होगा।
Author: ainewsworld