भारत-ग्रीस रक्षा सहयोग: आत्मनिर्भर भारत और एजेंडा 2030 के तहत स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिली नई दिशा
भारत और ग्रीस ने रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक साझेदारी की घोषणा करते हुए आत्मनिर्भर भारत अभियान एवं ग्रीस के रक्षा सुधार कार्यक्रमों के तहत अपने स्वदेशी रक्षा उद्योगों को मजबूत करने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग को गहरा करने के लिए एक संयुक्त आशय पत्र (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर किए गए, जो एक व्यापक पांच वर्षीय सहयोग रूपरेखा की नींव रखता है।
विस्तृत विवरण
रणनीतिक बैठक और समझौता
भारतीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और ग्रीस के रक्षा मंत्री निकोलाओस-जॉर्जियोस डेंडियास के मध्य नई दिल्ली में आयोजित द्विपक्षीय वार्ता में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। इस बैठक का केंद्र बिंदु द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और क्षेत्रीय शांति व सुरक्षा के मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना था।
सहयोग के प्रमुख बिंदु
1. औद्योगिक क्षमता निर्माण: ग्रीस के रक्षा सुधारों के माध्यम से भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और वैश्विक ‘एजेंडा 2030’ के लक्ष्यों को साधते हुए दोनों देश अपने स्वदेशी रक्षा उत्पादन का विस्तार करेंगे।
2. सैन्य सहयोग योजना: दोनों देशों ने वर्ष 2026 के लिए एक द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना का आदान-प्रदान किया, जिसमें दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच होने वाली संयुक्त गतिविधियों का रोडमैप तैयार किया गया है।
3. समुद्री साझेदारी: दोनों प्राचीन समुद्री राष्ट्रों ने समुद्री सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर सहमति जताई, जो हिंद महासागर और भूमध्यसागरीय क्षेत्र में स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
4. सूचना साझाकरण: ग्रीस ने गुरुग्राम स्थित इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर – हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) में एक अंतर्राष्ट्रीय संपर्क अधिकारी तैनात करने की घोषणा की, जो समुद्री डेटा साझाकरण और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देगा।
अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव
यह समझौता न केवल भारत और ग्रीस के बीच संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि यूरोप (ग्रीस), एशिया (भारत) और वैश्विक रक्षा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण विकास है। यह अमेरिका, रूस, यूक्रेन सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्मों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है, जहाँ रक्षा सहयोग और तकनीकी स्वावलंबन चर्चा के प्रमुख विषय हैं।
निष्कर्ष
भारत-ग्रीस के बीच यह बढ़ता रक्षा सहयोग दोनों देशों की सामरिक स्वायत्तता और आर्थिक विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से साकार करने की दिशा में एक सशक्त प्रयास है, जो अन्य देशों के लिए भी एक प्रेरणा बनेगा। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरणों के संयुक्त अनुसंधान, विकास और निर्माण पर और अधिक गतिविधियों की उम्मीद की जा सकती है।
Author: ainewsworld