ब्रिक्स की भारतीय कमान को मिला रूस का पूर्ण समर्थन, लावरोव ने कहा- ‘आधुनिक और प्रासंगिक है भारत का एजेंडा’
“भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स का एजेंडा आज की चुनौतियों का समाधान करते हुए भविष्य पर केंद्रित है। हम इसे और सक्रियता से समर्थन देंगे,” – रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने टीवी ब्रिक्स को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में यह बात कही।
प्रमुख तथ्य
· रूस का पूर्ण समर्थन: लावरोव ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को ‘आधुनिक और अत्यंत प्रासंगिक’ बताया।
· विस्तारित ब्रिक्स: अब इसमें 10 सदस्य देश शामिल हैं, जिसमें 2025 में इंडोनेशिया भी जुड़ा।
· आर्थिक वजन: क्रय शक्ति समानता के आधार पर ब्रिक्स देशों का सकल घरेलू उत्पाद G7 देशों के संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद से अधिक हो चुका है।
· भारत की प्राथमिकताएं: आतंकवाद-रोध, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शासन पर जोर।
· भू-राजनीतिक संतुलन: भारत QUAD का सदस्य होते हुए भी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और पुल निर्माता (ब्रिज बिल्डर) की भूमिका निभा रहा है।
लावरोव ने भारत के एजेंडे की सराहना की
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने स्पष्ट किया कि रूस भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के एजेंडे का पूर्ण और सक्रिय समर्थन करेगा। उन्होंने इस एजेंडे को “आधुनिक और अत्यंत प्रासंगिक” बताया, जो न केवल वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से निपटता है बल्कि भविष्य की तैयारी पर भी केंद्रित है।
लावरोव ने यह बात टीवी ब्रिक्स मीडिया नेटवर्क को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कही। यह साक्षात्कार 10 फरवरी को मनाए जाने वाले रूसी कूटनीतिक कर्मी दिवस की पूर्व संध्या पर प्रकाशित हुआ है।
भारत की ब्रिक्स प्राथमिकताएं: आतंकवाद से लेकर AI तक
भारत ने 1 जनवरी, 2026 से ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण की है। इस पद पर बैठकर भारत ने जिन प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है, उनमें शामिल हैं:
· आतंकवाद का मुकाबला: लावरोव ने कहा कि अफगानिस्तान और भारत-पाकिस्तान-अफगानिस्तान गलियारे सहित संवेदनशील क्षेत्रों में आतंकी गतिविधियाँ जारी हैं। रूस संयुक्त राष्ट्र में एक वैश्विक आतंकवाद-रोधी अधिवेशन को आगे बढ़ाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है।
· ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा: लावरोव ने ऊर्जा सुरक्षा को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे की प्रासंगिकता अमेरिका की ट्रंप प्रशासन द्वारा वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में की गई कार्रवाइयों के संदर्भ में और बढ़ जाती है।
· सूचना प्रौद्योगिकी एवं AI सुरक्षा: भारत जल्द ही एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें रूस को आमंत्रित किया गया है। लावरोव के अनुसार, राज्यों के बीच AI के उपयोग को विनियमित करने वाले मानदंड अभी स्थापित किए जा रहे हैं और यह एक गंभीर कूटनीतिक प्रयास है।
विस्तारित ब्रिक्स और बदलता वैश्विक परिदृश्य
ब्रिक्स का विस्तार हो चुका है। मूल चार देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन) से शुरू हुआ यह समूह अब दस सदस्यों वाला एक ब्लॉक है, जिसमें दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और 2025 में शामिल हुआ इंडोनेशिया शामिल है।
लावरोव ने इस विस्तार को एक “बहुध्रुवीय दुनिया” की ओर “अटल” ऐतिहासिक बदलाव के प्रमाण के रूप में पेश किया। उन्होंने दावा किया कि क्रय शक्ति समानता के आधार पर ब्रिक्स देशों का सकल घरेलू उत्पाद G7 देशों के संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद से अधिक हो गया है।
उन्होंने पश्चिमी देशों, विशेष रूप से अमेरिका पर, अपनी प्रभुत्व वाली स्थिति छोड़ने से इनकार करने और अमेरिकी डॉलर को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। लावरोव के अनुसार, यह संघर्ष पुराने विश्व व्यवस्था को बनाए रखने के लिए है, जो अमेरिकी डॉलर की भूमिका और पश्चिम द्वारा तैयार किए गए नियमों पर आधारित थी।
भारत: QUAD और ब्रिक्स के बीच पुल निर्माता
2026 का वर्ष भारत की विदेश नीति के लिए विशेष है। भारत न केवल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, बल्कि इसी वर्ष QUAD (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी करने वाला है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति भारत को एक “पुल निर्माता” (ब्रिज बिल्डर) की अद्वितीय भूमिका प्रदान करती है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हाल ही में कहा था कि “ब्रिक्स देश एंटी-जी7 नहीं बनने चाहिए और जी7 एंटी-ब्रिक्स नहीं बनना चाहिए।” उन्होंने भारत के साथ मिलकर पुल बनाने की इच्छा जताई थी।
पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुणायत के अनुसार, भारत की “वसुधैव कुटुम्बकम्” की विदेश नीति दर्शन में निहित समावेशी और सार्वभौमिक दृष्टिकोण इसे पूर्व-पश्चिम और उत्तर- दक्षिण विभाजन के बीच एक विश्वसनीय सेतु बनने में सक्षम बनाता है।
अमेरिकी दबाव और भारत की संतुलनकारी रणनीति
इस पृष्ठभूमि में, अमेरिका द्वारा भारत पर रूसी तेल आयात बंद करने के लिए दबाव एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है, हालांकि नई दिल्ली ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
विश्लेषण बताते हैं कि भारत एक व्यावहारिक बहु-संरेखण नीति अपना रहा है। इसके तहत रूस से औपचारिक दूरी बनाए बिना ही ऊर्जा और रक्षा स्रोतों का धीरे-धीरे विविधीकरण किया जा रहा है। साथ ही, अमेरिका के साथ व्यापार, प्रौद्योगिकी और इंडो-पैसिफिक साझेदारी का लाभ भी उठाया जा रहा है। इसका उद्देश्य दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखना है।
भविष्य की दिशा
रूस के भारत में राजदूत देनिस एलिपोव ने कहा है कि भारत की अध्यक्षता में 2030 तक की अवधि के लिए ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी रणनीति विकसित करने पर काम किया जाएगा। साथ ही, वैकल्पिक वित्तीय ढांचे के निर्माण और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं को जोड़ने जैसे प्रस्तावों पर भी सक्रिय कार्य की उम्मीद है।
लावरोव के इस समर्थन से स्पष्ट है कि ब्रिक्स मंच पर भारत-रूस सहयोग और मजबूत होगा। वैश्विक भू-राजनीति में बढ़ते तनाव के बीच, बहुध्रुवीय दुनिया के पैरोकार देशों के लिए ब्रिक्स एक महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है, और भारत की अध्यक्षता में इसकी दिशा तय होगी।
Author: ainewsworld