भारत-अमेरिका ऐतिहासिक व्यापार समझौता: किसानों के हित सुरक्षित, अमेरिका में मसालों को शून्य शुल्क, भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा – यह डील डिप्लोमेसी, डेवलपमेंट और डिग्निटी का बेहतरीन उदाहरण; भारत के प्रमुख अनाज और डेयरी उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते को ‘ऐतिहासिक और अभूतपूर्व’ बताते हुए कहा है कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति और ऊंचाइयां देने वाला साबित होगा। भोपाल स्थित अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस डील में भारतीय किसानों के हितों की पूरी तरह सुरक्षा की गई है तथा सभी संवेदनशील कृषि वस्तुओं को समझौते से बाहर रखा गया है।
‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति का प्रतीक
श्री चौहान ने कहा कि यह व्यापार समझौता केवल एक आर्थिक करार नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति का प्रतीक है। “यह डील दुनिया को संदेश देती है कि भारत की नीति कमिटमेंट की है, कॉम्प्रोमाइज की नहीं। हम आत्मविश्वास से देश के हित में निर्णय लेते हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक संतुलित, सकारात्मक रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है और एक भरोसेमंद, मजबूत साझेदार के रूप में उभरा है।
अमेरिका में भारतीय कृषि उत्पादों को शून्य टैरिफ का लाभ
केंद्रीय मंत्री ने डील के ठोस लाभों की चर्चा करते हुए बताया कि भारतीय किसानों के कई कृषि उत्पादों को अमेरिका में शून्य शुल्क (जीरो टैरिफ) पर निर्यात किया जाएगा। इनमें मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल तेल, सुपारी, काजू, एवोकाडो, आम, अमरूद, केला, पपीता, अनानास जैसे फल और कुछ अनाज शामिल हैं। उन्होंने खुलासा किया कि कई उत्पादों पर जो टैरिफ पहले 50 प्रतिशत तक था, उसे अमेरिका ने घटाकर शून्य कर दिया है। “वर्ष 2024-25 में भारत का कृषि निर्यात 4.45 बिलियन डॉलर तक पहुंचा है और मसाला निर्यात में 88% की वृद्धि हुई है। इस डील से हमारे मसालों को अमेरिका में एक विशाल बाजार मिलेगा।”
सभी संवेदनशील वस्तुएं बाहर: किसान पूरी तरह सुरक्षित
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस समझौते में भारत ने अपने सभी संवेदनशील कृषि उत्पादों को बाहर रखा है। श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, पोल्ट्री, डेयरी उत्पाद, केला, स्ट्रॉबेरी, खट्टे फल, दालें, तिलहन, इथेनॉल और तंबाकू जैसे उत्पादों पर किसी भी प्रकार की टैरिफ छूट नहीं दी गई है। उन्होंने गर्व से कहा, “हमारे प्रमुख अनाज, प्रमुख फल और डेयरी उत्पादों के लिए अमेरिका के लिए कोई द्वार नहीं खोला गया है। हमारे किसान पूरी तरह सुरक्षित हैं।”
उन्होंने आगे विस्तार से बताया कि अमेरिकी गेहूं, मक्का, चावल, बाजरा, आलू, प्याज, दलहन, खट्टे फल, स्ट्रॉबेरी और डेयरी उत्पादों (जैसे दूध, पनीर, मक्खन, घी) को भारतीय बाजार में प्रवेश की अनुमति नहीं है। इसी तरह, अमेरिका से काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, जीरा, हल्दी, अदरक जैसे मसाले भी आयात नहीं किए जाएंगे, जिससे भारतीय मसाला बाजार भी संरक्षित रहेगा।
टेक्सटाइल, ज्वेलरी और एमएसएमई सेक्टर को बड़ा बढ़ावा
श्री चौहान ने बताया कि इस डील का लाभ केवल कृषि तक सीमित नहीं है। टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और एमएसएमई सेक्टर को भी व्यापक अवसर मिलेंगे। “टेक्सटाइल सेक्टर में अब हमारा टैरिफ प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में घटकर लगभग 18% रह गया है, जिससे निर्यात को गति मिलेगी और कपास उत्पादक किसानों को लाभ होगा।”
महिलाओं और युवाओं के लिए नए अवसर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह समझौता भारतीय युवाओं, महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए नए रोजगार और उद्यमिता के द्वार खोलेगा। “हमारी सेल्फ हेल्प ग्रुप की बहनों के हुनर को वैश्विक पहचान मिलेगी। यह डील डिप्लोमेसी, डेवलपमेंट और डिग्निटी (गरिमा) का एक उत्तम उदाहरण है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का श्रेय देते हुए बताया कि अब तक अमेरिका, यूएई, ओमान, न्यूजीलैंड और यूके सहित नौ देशों के साथ एफटीए किया जा चुका है, जिसका व्यापक लाभ देश की अर्थव्यवस्था, किसानों, मजदूरों और निर्यातकों को मिलेगा। “यही मार्ग 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में मददगार साबित होगा।”
Author: ainewsworld