नीति आयोग ने जारी की ‘विकसित भारत’ और नेट जीरो 2070 की रणनीति पर तीन महत्वपूर्ण रिपोर्ट्स – जानिए पूरी जानकारी

विकसित भारत और नेट जीरो लक्ष्य की दिशा में नीति आयोग की बड़ी पहल, तीन रिपोर्ट्स हुईं जारी

नई दिल्ली: नीति आयोग ने आज यहाँ ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य और साल 2070 तक ‘नेट जीरो’ (शुद्ध शून्य उत्सर्जन) प्राप्त करने की रणनीति पर तीन महत्वपूर्ण अध्ययन रिपोर्टें जारी की हैं। इन रिपोर्टों में देश के समग्र विकास की रूपरेखा, इसके व्यापक आर्थिक निहितार्थ और वित्तपोषण संबंधी आवश्यकताओं पर गहन विश्लेषण किया गया है।

नीति आयोग के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने इन रिपोर्टों को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि “ऊर्जा परिवर्तन भारत की दीर्घकालिक विकास रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ बना हुआ है। ये रिपोर्टें देश के भविष्य के विकास पर विमर्श के लिए एक मानदंड स्थापित करेंगी।”

क्या कहती हैं रिपोर्ट्स?

नीति आयोग द्वारा जारी इन तीन रिपोर्टों में भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ाते हुए जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने का मार्गदर्शन किया गया है। रिपोर्टों में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत के पास हरित प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाकर एक विकसित, समृद्ध और टिकाऊ अर्थव्यवस्था बनने की अपार संभावना है।

इस अवसर पर नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने कहा, “भारत की विकास यात्रा अभूतपूर्व है। हम न केवल एक विकसित आर्थिक स्तर हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं, बल्कि साथ ही 2070 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को शुद्ध शून्य स्तर तक ले जाने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने आगे कहा कि भारत का यह विकास मॉडल दुनिया के अन्य विकासशील देशों के लिए एक मिसाल बनेगा।

वैश्विक महत्व और प्रभाव

नीति आयोग की यह रिपोर्ट सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्व रखती है। विश्व के सामने जलवायु परिवर्तन की चुनौती को देखते हुए, अमेरिका, यूक्रेन, रूस सहित तमाम देश सतत विकास के रास्ते तलाश रहे हैं। भारत द्वारा प्रस्तुत यह रोडमैप उन देशों के लिए भी एक संदर्भ बिंदु हो सकता है जो आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना चाहते हैं।

आगे की राह

रिपोर्टों में स्पष्ट किया गया है कि नेट जीरो लक्ष्य तक पहुँचने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र से भारी निवेश और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता होगी। हरित ऊर्जा, टिकाऊ बुनियादी ढाँचे और नवीन प्रौद्योगिकियों में निवेश भारत की इस हरित यात्रा के केंद्र में होंगे।

नीति आयोग की यह पहल साबित करती है कि भारत न केवल अपने विकास के लक्ष्यों के प्रति गंभीर है, बल्कि वैश्विक जलवायु जिम्मेदारी निभाने के लिए एक ठोस और व्यवहारिक रोडमैप भी तैयार कर रहा है।

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Author: ainewsworld

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