अमेरिकी प्रशासन द्वारा वेनेजुएला में की गई एक विवादास्पद सैन्य कार्रवाई, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाकर अमेरिका लाया गया, ने देश में ही तीखी राजनीतिक बहस और जनविरोध को जन्म दिया है। अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट पार्टी के कई सांसदों ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
डेमोक्रेट सांसदों का आरोप है कि यह सैन्य हस्तक्षेप बिना अमेरिकी कांग्रेस की संवैधानिक मंजूरी के किया गया, जो देश के कानूनों के खिलाफ है। उन्होंने इस कार्रवाई को “साम्राज्यवादी” और वेनेजुएला की संप्रभुता का हनन करार दिया है। उनका कहना है कि ऐसे एकतरफा फैसले अमेरिका की वैश्विक साख को नुकसान पहुंचाते हैं और दुनिया भर में तनाव बढ़ाते हैं।
इस बीच, अमेरिका के कई प्रमुख शहरों में सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर, वाशिंगटन, लॉस एंजिल्स, शिकागो, बोस्टन, अटलांटा और मयामी में लोगों ने इस सैन्य कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने “मादुरो की गिरफ्तारी गलत है” और “युद्ध नहीं, शांति चाहिए” जैसे नारों के साथ पोस्टर लहराए।
कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों और कानूनी विशेषज्ञों ने भी इस कार्रवाई की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि किसी संप्रभु राष्ट्र के नेता को इस तरह से हटाना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता है।
इस कदम से न केवल वेनेजुएला बल्कि लैटिन अमेरिका के अन्य देशों में भी राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे अमेरिका और चीन, रूस जैसे वेनेजुएला के अन्य सहयोगी देशों के बीच तनाव भी बढ़ सकता है।
फिलहाल, व्हाइट हाउस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, डेमोक्रेट सांसदों का दबाव है कि प्रशासन इस मामले पर कांग्रेस के समक्ष पूरी जानकारी पेश करे और भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों से बचे।
Author: ainewsworld