विदेशी सामान पर 12% का ‘दंड’, राजस्थान शिक्षा मंत्री ने स्कूलों और शिक्षकों से कहा – ‘स्वदेशी अपनाओ, देश को मजबूत बनाओ’

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने राज्य के शिक्षकों से स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने और विदेशी सामान से परहेज करने का आह्वान किया है। उन्होंने यह बात राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेश अधिवेशन के पहले दिन मंच से संबोधित करते हुए कही।

शिक्षा मंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि अब राज्य के स्कूलों में विदेशी सामान की खरीद और उपयोग पर 12 प्रतिशत की दर से वसूली की जाएगी। उन्होंने इस कदम का कारण बताते हुए कहा, “हम अनजाने में विदेशी वस्तुएं खरीदकर उन देशों की अर्थव्यवस्था मजबूत कर रहे हैं, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारत के खिलाफ काम करते हैं।”

शिक्षक हैं समाज के रोल मॉडल’

मदन दिलावर ने शिक्षकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक समाज के पथ-प्रदर्शक और आदर्श होते हैं। यदि शिक्षक स्वयं स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करेंगे, तो समाज और आने वाली पीढ़ी भी उसी रास्ते पर चलेगी। उन्होंने शिक्षकों से दैनिक जीवन में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया, ताकि देश का धन देश में ही रहे और भारतीय अर्थव्यवस्था सशक्त बने।

स्वदेशी के लिए संकल्प दिलाया

अपने संबोधन में मंत्री ने विदेशी उत्पादों पर सीधा प्रहार किया। उनका कहना था कि सस्ते विदेशी सामान के लालच में हम अपनी संस्कृति, कुटीर उद्योग और स्वदेशी उत्पादों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षकों को संकल्प भी दिलाया कि वे न केवल स्वयं स्वदेशी अपनाएंगे, बल्कि अपने विद्यार्थियों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे।

शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध’

शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार शिक्षकों के सम्मान और उनके हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने शिक्षकों से अपेक्षा जताई कि वे विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, संस्कारों और राष्ट्रभक्ति की शिक्षा भी दें। इससे एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का रास्ता सुनिश्चित होगा।

उन्होंने कहा कि राजस्थान को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाना सरकार का लक्ष्य है और इसमें शिक्षकों की भूमिका सर्वोपरि है। अधिवेशन में प्राप्त सुझावों पर गंभीरता से विचार करने तथा शिक्षा विभाग में मौजूद विसंगतियों को दूर करने का भरोसा भी उन्होंने दिलाया।

यह नीति न केवल स्कूली व्यवस्था में बदलाव ला सकती है, बल्कि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की एक बड़ी सामाजिक पहल के रूप में भी देखी जा रही है।

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Author: ainewsworld

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