एक ऐतिहासिक बजट आवंटन और बहुआयामी योजनाओं के जरिए भारत का कृषि क्षेत्र नए युग में प्रवेश कर रहा है।

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भारत सरकार देश के किसानों की आय में वृद्धि करने और कृषि क्षेत्र के समग्र एवं सतत विकास को सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक एवं एकीकृत रणनीति पर काम कर रही है। यह रणनीति राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से कई प्रमुख स्तंभों पर टिकी है।
एकीकृत रणनीति के प्रमुख स्तंभ
सरकार की योजनाओं का केंद्र बिंदु निम्नलिखित छह मुख्य उद्देश्य हैं:
1. उत्पादकता में वृद्धि: फसल उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने पर जोर।
2. लागत में कमी: किसानों की उत्पादन लागत को कम करने के उपाय।
3. लाभकारी मूल्य: किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाकर आय बढ़ाना।
4. कृषि विविधीकरण: खेती के पारंपरिक तरीकों से हटकर नए विकल्पों को बढ़ावा।
5. मूल्यवर्धन: फसल कटाई के बाद प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को प्रोत्साहन।
6. जलवायु अनुकूलन: सतत कृषि के लिए जलवायु परिवर्तन के अनुरूप ढलना और फसल हानि कम करना।
बजटीय प्रतिबद्धता में उल्लेखनीय उछाल
किसान कल्याण के प्रति सरकार की गंभीरता का अंदाजा बजट आवंटन से लगाया जा सकता है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का बजट वर्ष 2013-14 में 21,933.50 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1,27,290.16 करोड़ रुपये हो गया है, जो एक ऐतिहासिक वृद्धि है।
प्रमुख योजनाएं जो बदल रही हैं कृषि परिदृश्य
सरकार ने अपनी एकीकृत रणनीति को कार्यान्वित करने के लिए कई प्रमुख योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें शामिल हैं:
· प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): छोटे और सीमांत किसानों को आय सहायता प्रदान करने वाली प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना।
· प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY): किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच।
· किसान उत्पादक संगठन (FPOs): 10,000 नए एफपीओ बनाने और मजबूत करने की पहल, ताकि किसानों की सामूहिक बाजार पहुंच और सौदेबाजी की शक्ति बढ़े।
· कृषि अवसंरचना कोष (AIF): कृषि संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तीय सहायता।
· डिजिटल कृषि मिशन: कृषि क्षेत्र में तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देना।
· प्राकृतिक कृषि पर राष्ट्रीय मिशन: पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहन।
· नमो ड्रोन दीदी: महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन प्रौद्योगिकी से जोड़कर कृषि में महिला सशक्तिकरण।
इनके अलावा, प्रति बूंद अधिक फसल (सूक्ष्म सिंचाई), मृदा स्वास्थ्य कार्ड, राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन मिशन, और कृषि यंत्रीकरण जैसी दर्जनों योजनाएं कृषि के हर पहलू को समग्रता से संबोधित कर रही हैं।
भारत सरकार की यह बहुआयामी और एकीकृत कृषि रणनीति न केवल किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्रित है, बल्कि इसका लक्ष्य पूरे कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना, उसे आधुनिक बनाना और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के प्रति लचीला बनाना भी है। बजट आवंटन में भारी वृद्धि इस दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से भारतीय कृषि को एक नई दिशा मिलने और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में देश की भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।
Author: ainewsworld