भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती: जनजातीय गौरव दिवस, 2025 का भव्य आयोजन

“भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों ने हमें सिखाया कि सच्ची शिक्षा वह है जो नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करे।”

नई दिल्ली, 14 नवंबर, 2025: विधायी विभाग ने आज स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाई। यह कार्यक्रम जनजातीय गौरव दिवस, 2025 के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और सामाजिक सुधारों में योगदान को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।

ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बना विधायी विभाग

कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायी विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि ने की। इस ऐतिहासिक अवसर पर अपर सचिव श्री आर.के. पटनायक और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। साथ ही, राजभाषा इकाई (ओएलडब्ल्यू) और विधि साहित्य प्रकाशन (वीएसपी) जैसे संबद्ध कार्यालयों के प्रतिनिधियों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लेकर इसे सार्थक बनाया।

डॉ. राजीव मणि ने अपने संबोधन में जनजातीय समुदायों के उत्थान, सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पहचान के लिए भगवान बिरसा मुंडा के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन और संघर्ष आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

शिक्षा में नैतिक मूल्यों की प्रासंगिकता

इस अवसर पर डॉ. एम.के. तोमर ने स्वास्थ्य एवं कल्याण विषय पर व्याख्यान दिया। शिक्षा और नैतिक मूल्यों के संदर्भ में यह बात उजागर हुई कि “शिक्षा वह है जो स्कूल में सीखी गई बातों को भूल जाने के बाद भी बची रहती है” । भगवान बिरसा मुंडा का जीवन इस बात का जीवंत उदाहरण है कि नैतिक मूल्यों के बिना शिक्षा का वही महत्व है जो नाविक के बिना नाव का है ।

आज के दौर में, जब शिक्षा कंप्यूटर और डिजिटल माध्यमों में प्रवेश कर चुकी है, भगवान बिरसा मुंडा के आदर्श हमें याद दिलाते हैं कि शिक्षा का असल उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण करना है ।

भगवान बिरसा मुंडा का स्थायी legacy (विरासत)

भगवान बिरसा मुंडा (1875-1900) का संक्षिप्त जीवनकाल भले ही छोटा रहा हो, परंतु उनका सामाजिक-आर्थिक सुधारों में नेतृत्व और जनजातीय लोगों के अधिकारों की वकालत करने का उनका अथक प्रयास भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बन गया। इस कार्यक्रम में दिखाए गए लघु वीडियो ने जनजातियों और स्वतंत्रता संग्राम के लिए उनके जीवन, बलिदान और योगदान पर मार्मिक ढंग से प्रकाश डाला।

सचिव महोदय ने अपने संबोधन में भारत के समावेशी लोकतांत्रिक ढाँचे को मजबूत करने में बिरसा मुंडा की स्थायी विरासत का स्मरण किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के आदर्श और मूल्य न केवल उनके समय में बल्कि आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

मूल्य विकास में संस्थानों की भूमिका

यह कार्यक्रम उस broader (व्यापक) सिद्धांत का भी प्रतिबिंब था कि कैसे शैक्षिक और सरकारी संस्थानें मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं । मूल्य मौलिक विश्वास हैं जो दृष्टिकोण या कार्यों को निर्देशित या प्रेरित करते हैं । भगवान बिरसा मुंडा का जीवन सही आचरण, शांति, सत्य, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और अनुशासन जैसे मानवीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण है ।

समारोह का समापन और भविष्य की राह

कार्यक्रम का समापन लोक निर्माण सचिव द्वारा भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों और मूल्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिरसा मुंडा की शिक्षाएँ और सिद्धांत आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने उनके समय में थे।

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम ने न केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक को श्रद्धांजलि दी, बल्कि यह भी रेखांकित किया कि भारत की विविधता में एकता और अखंडता को बनाए रखने में ऐसे महानायकों के योगदान को कैसे याद रखा जाए और उनसे प्रेरणा ली जाए ।

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Author: ainewsworld

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