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राजस्थान दिवस: स्कूलों में सांस्कृति की बहार, पहनावे और बोली में झलकेगी राजस्थानी पहचान”

राजस्थान सरकार ने राज्य के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए एक विशेष पहल शुरू की है। 29 मार्च को राजकीय विद्यालयों में राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दिन छात्रों और शिक्षकों को पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा जैसे साफा, धोती-कुर्ता, कुर्ता-पायजामा और राजपूती पोशाक पहनने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वे राज्य की लोक परंपराओं से गहराई से जुड़ सकें।

तिथि परिवर्तन और नो बैग डे

मुख्य आयोजन 30 मार्च (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) को राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाना था, लेकिन यह दिन रविवार को पड़ने के कारण स्कूली गतिविधियाँ 29 मार्च को ही नो बैग डे के तहत संपन्न होंगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।

सांस्कृतिक गतिविधियाँ और अभिवादन शैली

इस दिन स्कूलों में “गुड मॉर्निंग” और “नमस्ते” के स्थान पर राजस्थानी बोली में “खम्माघणी”, “राम-राम सा” और “पधारो सा” जैसे पारंपरिक अभिवादन शब्दों का उपयोग किया जाएगा। साथ ही, छात्र राजस्थानी भाषा में भाषण, कविता प्रतियोगिताएँ देंगे और मुहावरों व लोकोक्तियों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति को जानेंगे। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना है।

लोक परंपराओं को समझने का अवसर

शिक्षा विभाग के अनुसार, यह पहल छात्रों को राज्य की सांस्कृतिक विविधता को “करीब से समझने और आत्मसात करने” का मौका देगी। पारंपरिक पोशाक पहनने से लेकर स्थानीय बोली के प्रयोग तक, हर गतिविधि में राजस्थान की पहचान को उजागर किया जाएगा। इसके साथ ही, स्कूलों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों से समुदाय और विद्यार्थियों के बीच सांस्कृतिक संवाद को भी बल मिलेगा।

यह अनूठा प्रयास न केवल युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ेगा, बल्कि राजस्थानी भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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Author: ainewsworld

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