पश्चिम एशिया में संघर्ष भड़का: इजराइल का तेहरान और बेरूत पर बड़ा हमला, अमेरिका भी कार्रवाई में शामिल, हिजबुल्लाह और जिहादी कमांडर ढेर

पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर। इज़राइल ने तेहरान और बेरूत में सैन्य ठिकानों पर बोला हमला, हिज़्बुल्लाह और फिलिस्तीनी जिहाद के कमांडर ढेर। ईरान ने बहरीन और सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना। पढ़ें पूरी अपडेट।

पश्चिम एशिया में एक बार फिर जंग की आग भड़क उठी है। इजराइल और अमेरिका ने ईरान और उसके समर्थक संगठनों के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान और लेबनान की राजधानी बेरूत में एक साथ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। वहीं, अमेरिका ने भी ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के ठिकानों को ध्वस्त करने का दावा किया है। इस संघर्ष में हिजबुल्लाह और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद के कई टॉप कमांडरों के मारे जाने की खबर है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है।

इजराइल का ‘टू-फ्रंट’ अटैक: तेहरान और बेरूत पर मिसाइलें बरसाईं

समाचार एजेंसियों के अनुसार, इजराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने देर रात तेहरान और बेरूत में मौजूद सैन्य प्रतिष्ठानों पर सटीक और एक साथ हमले किए। आईडीएफ का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान समर्थित आतंकी संगठन हिजबुल्लाह और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद के खिलाफ जारी अभियान का हिस्सा है। इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में सीमा से सटे इलाकों में अपने सैनिकों को तैनात कर दिया है और हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे को निशाना बना रही है। इजराइल का आरोप है कि हिजबुल्लाह ईरान के इशारे पर इजराइल पर हमले की साजिश रच रहा था।

बड़ा झटका: हिजबुल्लाह और फिलिस्तीनी जिहाद के टॉप कमांडर मारे गए

इजराइली हमलों में आतंकी संगठनों को बड़ा नुकसान हुआ है। आईडीएफ ने पुष्टि की है कि बेरूत में हुए हमले में फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (PIJ) का वरिष्ठ कमांडर अबू हमजा रामी मारा गया। उसे इजराइल के खिलाफ अभियानों का मास्टरमाइंड माना जाता था। इसके अलावा, एक अन्य लक्षित हमले में हिजबुल्लाह के खुफिया मुख्यालय का प्रमुख हुसैन मकलद भी ढेर कर दिया गया। इन हत्याओं से हिजबुल्लाह और फिलिस्तीनी जिहाद की कमान को एक बड़ा झटका लगा है।

अमेरिका ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड को निशाना बनाया

इजराइल के साथ ही अमेरिका ने भी ईरान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि उसने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के कमांड सेंटर, वायु रक्षा प्रणालियों, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च पैड को नष्ट कर दिया है। सेंटकॉम ने एक बयान में कहा है, “अमेरिका ईरानी शासन से पैदा होने वाले खतरों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई जारी रखेगा।” हालांकि, इस कार्रवाई में अब तक छह अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की भी खबर है, जो अमेरिका के लिए एक बड़ा नुकसान है।

ईरान का जवाबी एक्शन: बहरीन और सऊदी में अमेरिकी ठिकानों पर हमले

ईरान ने भी मोर्चा खोल दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, बहरीन में स्थित अमेरिकी वायुसेना बेस के कमांड भवन को नष्ट कर दिया गया है। बहरीन के अमेरिकी राजदूत अब्दुल्ला बिन राशिद अल खलीफा ने आरोप लगाया कि ईरान ने उनके देश पर 70 बैलिस्टिक मिसाइल और 59 ड्रोन दागे, जिन्हें बहरीन की वायु रक्षा प्रणाली ने नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान ने बहरीन में नागरिक स्थलों को भी निशाना बनाया।

वहीं, सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास पर भी ईरान की ओर से दो ड्रोन दागे गए। इस हमले में थोड़ा बहुत नुकसान हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि अमेरिका इसका जवाब देगा और ईरान को सबक सिखाएगा।

परमाणु संकट की आशंका: नतान्ज़ संयंत्र को नुकसान

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने उपग्रह तस्वीरों के आधार पर पुष्टि की है कि ईरान के नतान्ज़ स्थित परमाणु संयंत्र में संरचनात्मक क्षति हुई है। हालांकि, एजेंसी ने राहत भरी खबर दी है कि विकिरण रिसाव का कोई संकेत नहीं है और भूमिगत संवर्धन संयंत्र पर कोई असर नहीं पड़ा है। यह क्षति किस हमले या दुर्घटना से हुई, इसका खुलासा नहीं हो पाया है।

प्राकृतिक आपदा: ईरान में भूकंप के झटके

युद्ध के बीच ईरान में प्रकृति भी कहर बरपा रही है। ईरान के गेराश क्षेत्र में 4.3 तीव्रता का भूकंप आया। अभी तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन इससे लोगों में दहशत फैल गई है।

क्षेत्र में बिगड़ते हालात और अंतरराष्ट्रीय चिंता

पश्चिम एशिया में यह नया उभार पूरे क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी है। एक तरफ इजराइल और ईरान आमने-सामने हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका खुलकर इजराइल के साथ खड़ा है। लेबनान, सीरिया, बहरीन और सऊदी अरब भी इस संघर्ष की चपेट में आ गए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम बरतने की अपील की है, लेकिन जमीनी हालात युद्ध के और फैलने के संकेत दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है, जिसके वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति पर दूरगामी परिणाम होंगे।

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Author: ainewsworld

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