नेपाल में चुनावी सहमति: राष्ट्रपति की पहल पर बड़े दल और सरकार मिले, अब 5 मार्च के मतदान पर टिकी सबकी नजर

नेपाल में आगामी 5 मार्च के प्रतिनिधि सभा चुनाव को सफल बनाने की दिशा में एक बड़ी राजनीतिक बाधा दूर हुई है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल की मध्यस्थता में मंगलवार को हुई ऐतिहासिक बैठक में प्रधानमंत्री सुशीला कार्की और देश की तीन प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के शीर्ष नेताओं के बीच चुनाव के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर सहमति बनी है। यह बैठक प्रधानमंत्री कार्की के सत्ता में आने के बाद पहली बार हुई थी, क्योंकि इससे पहले वह कुछ जेन-जी नेताओं के दबाव के कारण बड़े दलों के नेताओं से मिलने में अरुचि दिखा रही थीं।

राष्ट्रपति ने तोड़ी बर्फ, सभी पक्षों में हुई चुनाव को लेकर सहमति

बैठक में नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा, सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के संयोजक पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ ने हिस्सा लिया। राष्ट्रपति पौडेल के प्रेस सलाहकार किरण पोखरेल के अनुसार, “चुनाव को सफल बनाने के लिए सरकार और प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच समझौता हुआ है।” इसके तहत चुनावी माहौल बनाने के लिए जल्द ही प्रधानमंत्री आवास बालुवाटर में विस्तृत चर्चा भी होगी।

हालांकि, बैठक में सभी तीनों दलों के नेताओं ने सुरक्षा कारणों, 8-9 सितंबर की घटनाओं की जांच कर रही समिति द्वारा ओली पर लगे प्रतिबंध, अपर्याप्त चुनाव कानूनों और अन्य प्रबंधों को लेकर चुनाव को लेकर अनिश्चितता जताई। केपी शर्मा ओली ने विशेष रूप से नेताों की सुरक्षा को एक गंभीर मुद्दा बताया और कहा कि उन पर लगे प्रतिबंध चुनाव के अनुकूल माहौल नहीं बनने देते।

तैयारियां पूरी, लेकिन सुरक्षा चुनौती अलग

चुनाव आयोग ने औपचारिक रूप से बताया है कि 5 मार्च को होने वाले मतदान के लिए 20 जनवरी को नामांकन होगा। कार्यवाहक मुख्य निर्वाचन आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने कहा है कि चुनाव के लिए आवश्यक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और आयोग पूरी तरह तैयार है। हालांकि उन्होंने एक नई चुनौती की ओर भी इशारा किया। उनके अनुसार, पुराने और नए राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष के कारण सुरक्षा जोखिम का स्वरूप इस बार अलग हो सकता है। पहले जो क्षेत्र शांतिपूर्ण रहे हैं, वहां अशांति फैलाने के प्रयास हो सकते हैं, जबकि पहले के जोखिम वाले इलाके शांत रह सकते हैं।

चुनाव से जुड़े कुछ प्रमुख आंकड़े और तथ्य:

· मतदाता सूची: चुनाव की घोषणा के बाद मतदाता सूची में 10 लाख से अधिक नए मतदाता जोड़े गए हैं, जिससे कुल पंजीकृत मतदाता संख्या बढ़कर लगभग 1 करोड़ 92 लाख हो गई है।
· राजनीतिक दल: चुनाव में भाग लेने हेतु पंजीकृत दलों की संख्या 114 है, जो 2022 के चुनाव के मुकाबले काफी अधिक है।
· सीटें: प्रतिनिधि सभा की 275 सीटों के लिए चुनाव होना है, जिनमें से 165 सीधे और 110 आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से भरी जाएंगी।

Gen-Z आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट की याचिकाएं: बची हुई चुनौतियां

यह चुनाव ऐसे वक्त में हो रहा है जब देश सितंबर में हुए जेन-जी (Gen-Z) के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद उपजे राजनीतिक संकट से उबर रहा है। इस आंदोलन के दबाव में ही पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद छोड़ना पड़ा था और सुशीला कार्की की अंतरिम सरकार बनी थी। जेन-जी आंदोलन संवैधानिक संशोधन, भ्रष्टाचार जांच और चुनावी सुधार जैसे मुद्दों पर सरकार से लिखित आश्वासन चाहता है, जो अब तक नहीं मिला है। साथ ही, संसद की बहाली की मांग को लेकर सीपीएन-यूएमएल और नेपाली कांग्रेस के सांसदों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर 17 याचिकाएं भी एक बड़ी कानूनी चुनौती बनी हुई हैं।

अब सबकी निगाहें बालुवाटर की बैठक पर

राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में हुई यह बैठक चुनाव की राह में एक सकारात्मक कदम है। राष्ट्रपति पौडेल ने कहा कि चुनाव देश की गंभीर और संवेदनशील स्थिति से बाहर निकलने का रास्ता है और इसे सफल बनाना सभी की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री कार्की ने भी सभी पक्षों से कठिन परिस्थितियों में भी तय समय पर चुनाव कराने के लिए सहयोग का आग्रह किया। अब आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए जल्द ही प्रधानमंत्री आवास बालुवाटर में एक और बैठक होगी। इस बैठक के नतीजे यह तय करेंगे कि क्या नेपाल 5 मार्च को एक शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और सफल चुनाव की ओर बढ़ पाएगा ?

ainewsworld
Author: ainewsworld

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज