इंस्पायर योजना: भारत के युवा वैज्ञानिकों को मिल रहा है सपनों को उड़ान देने का मौका!

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की महत्वाकांक्षी पहल देश के स्कूली छात्रों से लेकर पोस्ट-डॉक शोधकर्ताओं तक को कर रही प्रोत्साहित, 10,000 रुपये से लेकर लाखों रुपये तक का मिल रहा है समर्थन।

देश के युवा वैज्ञानिक दिमागों को तराशने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नींव मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की एक योजना ने असाधारण सफलता हासिल की है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा संचालित “इनोवेशन इन साइंस पर्सूट फॉर इंस्पायर रिसर्च (INSPIRE)” योजना ने देश भर के लाखों मेधावी छात्रों के लिए विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में करियर बनाने का रास्ता आसान कर दिया है। यह योजना न केवल छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, बल्कि उन्हें देश के टॉप संस्थानों में मेंटरशिप और दुनिया के नामी वैज्ञानिकों से रूबरू होने का अवसर भी देती है।

क्या है इंस्पायर योजना?

इंस्पायर योजना का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को महाविद्यालय व विश्वविद्यालय स्तर पर बुनियादी विज्ञानों की पढ़ाई और रिसर्च के प्रति आकर्षित करना है। यह योजना कक्षा 6 के छात्र से लेकर पोस्ट-डॉक्टरल शोधकर्ता तक को एक सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करती है। यह पूरे देश के सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों और संस्थानों में फैली हुई है।

योजना के प्रमुख घटक:

1. इंस्पायर अवार्ड्स-मानक (MANAK):

· लक्ष्य: 10 से 17 वर्ष (कक्षा 6 से 12 तक) के स्कूली छात्रों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देना।
· लाभ: प्रत्येक पात्र स्कूल हर साल 5 छात्रों के मौलिक विचार (आइडिया) नामांकित कर सकता है। चयनित छात्रों को अपना मॉडल या प्रोजेक्ट बनाने के लिए 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में दी जाती है। इन छात्रों को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में भाग लेने का मौका मिलता है।
· आवेदन: ऑनलाइन आवेदन ई-मिआस पोर्टल (www.inspireawards-dst.gov.in) पर किए जाते हैं।

2. इंस्पायर इंटर्नशिप:

· लक्ष्य: 10वीं कक्षा पास 50,000 मेधावी छात्रों को विज्ञान शिविरों के माध्यम से वैज्ञानिक अनुभव देना।
· लाभ: पांच दिवसीय आवासीय शिविरों में छात्रों को नोबेल पुरस्कार विजेताओं सहित प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों से सीधा संवाद करने का अवसर मिलता है। इससे उनकी जिज्ञासा बढ़ती है और विज्ञान को करियर के रूप में चुनने की प्रेरणा मिलती है।

3. उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति (SHE):

· लक्ष्य: 17-22 वर्ष के प्रतिभाशाली युवाओं को बुनियादी विज्ञान में उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना।
· लाभ: प्रति वर्ष 80,000 रुपये की दर से 12,000 छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। साथ ही ग्रीष्मकालीन कार्यशालाओं के माध्यम से अग्रणी शोधकर्ताओं से मार्गदर्शन मिलता है।

4. इंस्पायर फेलोशिप:

· लक्ष्य: इंजीनियरिंग, मेडिकल, कृषि जैसे क्षेत्रों में टॉप रैंक हासिल करने वाले या एमएससी में 70% अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को पीएचडी शोध के लिए वित्तीय सहायता देना।
· लाभ: फेलोशिप पीएचडी पूरी होने तक अधिकतम 5 वर्षों के लिए मिलती है। वर्तमान में जूनियर रिसर्च फेलो (JRF) को 37,000 रुपये प्रति माह + HRA और सीनियर रिसर्च फेलो (SRF) को 42,000 रुपये प्रति माह + HRA मिलता है, साथ ही वार्षिक आकस्मिक निधि भी।

5. इंस्पायर फैकल्टी फेलोशिप:

· लक्ष्य: 27-32 वर्ष आयु वर्ग के पोस्ट-डॉक्टरल शोधकर्ताओं को फैकल्टी के रूप में करियर शुरू करने में मदद करना।
· लाभ: चयनित फेलो को 5 वर्षों के लिए 1,25,000 रुपये प्रति माह की फेलोशिप और कुल 35 लाख रुपये तक का रिसर्च ग्रांट मिलता है। SC/ST और महिला उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा में छूट है।

राजस्थान और राजसमंद में जागरूकता अभियान:

विभाग ने राजस्थान, विशेष रूप से राजसमंद लोकसभा क्षेत्र में योजना की पहुंच बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। पिछले पांच वर्षों में राज्य भर में 42 जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जिनमें राजसमंद के लिए विशेष रूप से 5 ऑनलाइन कार्यशालाएं शामिल हैं। इनसे लगभग 3,500 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है। स्कूलों में ऑडियो-विजुअल सामग्री और ब्रोशर वितरित किए गए हैं।

मेंटरशिप और पेटेंट का सफर:

इंस्पायर पुरस्कार विजेताओं को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत मेंटरिंग सिस्टम विकसित किया गया है। राज्य स्तर के विजेताओं को आईआईटी, एनआईटी, आईआईएसईआर जैसे प्रीमियर संस्थानों में विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलता है। पिछले पांच वर्षों में 119 मेंटरशिप कार्यशालाएं आयोजित कर 1,823 छात्रों को लाभान्वित किया गया है। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि अब तक 195 पेटेंट दाखिल किए जा चुके हैं, जिनमें से 38 पेटेंट सीधे छात्र नवप्रवर्तकों के नाम पर स्वीकृत हुए हैं।

इंस्पायर योजनाभारत में वैज्ञानिक शोध एवं विकास (R&D) की नींव को मजबूत करने वाली एक क्रांतिकारी पहल साबित हो रही है। यह योजना देश के कोने-कोने से प्रतिभा तलाशकर उसे राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ रही है। स्कूल स्तर से ही नवाचार को प्रोत्साहित करके यह योजना भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और शोधकर्ताओं की एक नई पीढ़ी तैयार कर रही है, जो ‘नए भारत’ की तकनीकी आत्मनिर्भरता का सपना साकार करेगी।

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Author: ainewsworld

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