जनजातीय समुदाय के उत्थान के लिए सरकार की बहुआयामी पहल, 10 प्रमुख योजनाओं से बदलेगी तस्वीर

 

सरकार की रणनीति स्पष्ट है: शिक्षा से लेकर आजीविका तक और स्वास्थ्य से लेकर शोध तक, हर क्षेत्र में जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा में लाने के लिए समग्र प्रयास किए जा रहे हैं।

देश भर में अनुसूचित जनजातीय समुदायों के सर्वांगीण विकास के लिए केंद्र सरकार ने कई महत्वाकांक्षी योजनाओं और अभियानों की शुरुआत की है। इन योजनाओं का उद्देश्य दशकों से चले आ रहे विकासात्मक अंतराल को पाटना, बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना और शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार के अवसरों तक पहुँच सुनिश्चित करना है।

इन प्रयासों के केंद्र में है विकास कार्य योजना (डीएपीएसटी) की रणनीति, जिसके तहत 41 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को अपने बजट का एक निर्धारित हिस्सा विशेष रूप से जनजातीय विकास पर खर्च करना अनिवार्य किया गया है।

प्रमुख योजनाएँ: एक नज़र में

1. धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए)

· लॉन्च: 2 अक्टूबर, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा।
· लक्ष्य: 5 वर्षों में 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 63,843 गाँवों में बुनियादी ढाँचे के अंतर को पूरा करना।
· बजट: कुल ₹79,156 करोड़ (केंद्र: ₹56,333 करोड़, राज्य: ₹22,823 करोड़)।
· कार्यक्षेत्र: 17 मंत्रालयों द्वारा क्रियान्वित 25 विशिष्ट उपाय, जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और आंगनवाड़ी सुविधाएँ शामिल हैं।

2. प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन)

· लॉन्च: 15 नवंबर, 2023 (जनजातीय गौरव दिवस)।
· लक्ष्य: विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) को 3 वर्षों में बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करना।
· परिव्यय: लगभग ₹24,000 करोड़।
· कार्यक्षेत्र: सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क संपर्क, विद्युतीकरण और स्थायी आजीविका।

3. प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम)

· उद्देश्य: जनजातीय आजीविका को बढ़ावा देना, विशेषकर लघु वन उपज (एमएफपी) के माध्यम से।
· मुख्य विशेषता: चयनित वन उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी। बाजार मूल्य एमएसपी से कम होने पर राज्य एजेंसियाँ पूर्वनिर्धारित एमएसपी पर खरीदारी करेंगी।
· लाभ: वनवासियों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और उनकी आय सुरक्षित करना।

शिक्षा एवं छात्रवृत्ति: भविष्य निर्माण की नींव

जनजातीय युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने के लिए कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं:

· एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस): वर्ष 2018-19 में शुरू। लक्ष्य है देश भर में 728 ईएमआरएस स्कूल स्थापित करना, जो लगभग 3.5 लाख छात्रों को लाभान्वित करेंगे। ये स्कूल 50% से अधिक जनजातीय आबादी वाले ब्लॉक में खुलेंगे।
· मैट्रिक-पूर्व एवं मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति: कक्षा 9 से लेकर उच्च शिक्षा तक के जनजातीय छात्रों को वित्तीय सहायता। माता-पिता की वार्षिक आय ₹2.5 लाख से कम होनी चाहिए।
· राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति: प्रतिवर्ष 20 मेधावी छात्रों को विदेशों में स्नातकोत्तर, पीएचडी व पोस्ट-डॉक्टोरल अध्ययन के लिए वित्तीय सहायता। इनमें से 3 सीटें विशेष रूप से पीवीटीजी छात्रों के लिए आरक्षित हैं।
· राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति और शीर्ष श्रेणी छात्रवृत्ति: देश के उत्कृष्ट संस्थानों (जैसे आईआईटी, एम्स, आईआईएम) में स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति और एम.फिल/पीएच.डी. के लिए अध्येतावृत्ति।

अन्य महत्वपूर्ण पहलें

· अनुच्छेद 275(1) के तहत अनुदान: यह एक विशेष क्षेत्र कार्यक्रम है, जिसके तहत अनुसूचित जनजाति बहुल राज्यों को बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए 100% अनुदान दिया जाता है।
· स्वैच्छिक संगठनों को अनुदान: जनजातीय कल्याण के क्षेत्र में काम कर रहे स्वैच्छिक संगठनों को आवासीय विद्यालय, अस्पताल, आजीविका परियोजनाएं चलाने के लिए वित्तीय सहायता।
· जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को सहायता: जनजातीय इतिहास, संस्कृति, भाषा और कला के अनुसंधान, दस्तावेजीकरण और संरक्षण के लिए संस्थानों को सहायता प्रदान करना।

भविष्य की राह

सरकार का यह बहु-आयामी दृष्टिकोण इस बात का संकेत है कि जनजातीय विकास को अब अलग-थलग नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास के मुख्यधारा में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। धरती आबा अभियान जैसे बड़े मिशन से ग्रामीण बुनियादी ढाँचे में बदलाव आने की उम्मीद है, जबकि पीएमजेवीएम जैसी योजनाएं स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर सकती हैं। हालाँकि, इन योजनाओं का सफलता स्तर इस बात पर निर्भर करेगा कि जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन कितना प्रभावी होता है और लाभार्थियों तक संसाधनों की पहुँच कितनी सुगम बन पाती है।

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Author: ainewsworld

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