भारत और रूस ने डाक सेवाओं में बढ़ाया कदम: ई-कॉमर्स व्यापार को मिलेगी नई गति

 

रूसी राष्ट्रपति पुतिन की दिसंबर 2025 में भारत यात्रा के दौरान हुई इस ऐतिहासिक डाक समझौते से भारतीय एमएसएमई और छोटे उद्यमियों के लिए रूस का विशाल बाजार अब और आसानी से सुलभ होगा।

दिसंबर 2025 में भारत और रूस के बीच इंटरनेशनल ट्रैक्ड पैकेट सर्विस (आईटीपीएस) पर हस्ताक्षरित ऐतिहासिक समझौता दोनों देशों के बीच बढ़ते ई-कॉमर्स व्यापार को एक नया आधार प्रदान करेगा। यह समझौता भारतीय डाक विभाग और जेएससी रूस पोस्ट के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि में हुआ।

भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता सीमा पार डाक सहयोग को मजबूती देने और दोनों देशों के बीच ई-कॉमर्स व्यापार की बढ़ती मात्रा को सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

आईटीपीएस समझौता: क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण?

इंटरनेशनल ट्रैक्ड पैकेट सर्विस (आईटीपीएस) एक विशेष डाक सेवा है, जिसका उद्देश्य कम मूल्य की खेपों के लिए एक किफायती, ट्रैक करने योग्य और विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स चैनल तैयार करना है। यह सेवा वैश्विक ई-कॉमर्स पारिस्थितिकी तंत्र की एक आवश्यक आवश्यकता को पूरा करती है।

इस सेवा में तीन प्रमुख विशेषताएं शामिल हैं:

· इलेक्ट्रॉनिक अग्रिम डेटा ट्रांसमिशन: सीमा शुल्क निकासी की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना
· एंड-टू-एंड ट्रैकिंग: पूरी डिलीवरी प्रक्रिया पर नजर रखने की सुविधा
· डिलीवरी की पुष्टि: अंतिम ग्राहक तक पार्सल के पहुंचने की पक्की जानकारी

मंत्रालय का कहना है कि इस समझौते के तहत रूसी पोस्ट द्वारा तरजीही डिलीवरी दरों की पेशकश के साथ, भारतीय डाक विभाग निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी दरों पर यह सेवा प्रदान करने में सक्षम होगा। इससे भारतीय विक्रेताओं के लिए मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता और बाजार की सुलभता में सुधार होने की उम्मीद है।

भारत-रूस संबंधों की मजबूत बुनियाद

यह डाक समझौता, दोनों देशों के बीच मजबूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है। दिसंबर 2025 में हुई 23वीं वार्षिक शिखर बैठक में दोनों नेताओं ने 2030 तक 100 अरब अमरीकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य की दिशा में प्रगति में तेजी लाने पर बल दिया था।

भारत-रूस संबंध “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक विकसित हुए हैं, जो राजनीतिक, सुरक्षा, रक्षा, व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहित कई क्षेत्रों में फैले हुए हैं। दोनों नेताओं ने इस साझेदारी को “साथ चलें, साथ बढ़ें” (Go Together, Grow Together) की भावना का प्रतीक बताया है।

छोटे व्यवसायों के लिए बड़ा अवसर

इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), कारीगरों, स्टार्ट-अप्स और ग्रामीण उद्यमियों को मिलने की उम्मीद है। यह सेवा उन्हें प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक्स दरों और विश्वसनीय डिलीवरी समय-सीमा के साथ रूसी ई-मार्केटप्लेस पर अपने उत्पाद बेचने में सक्षम बनाएगी।

डाक विभाग ने छोटे व्यवसायों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचने में सहायता प्रदान करने के लिए पहले से ही सीबीआईसी के सहयोग से देश भर में 1,013 डाक घर निर्यात केंद्र (डीएनके) स्थापित किए हैं। डाक माध्यम से होने वाले निर्यात का एक बड़ा हिस्सा श्रेणी-2 और श्रेणी-3 के शहरों से आता है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में छोटे उद्यमों और व्यक्तिगत उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।

व्यापक आर्थिक सहयोग की दिशा में एक कदम

यह डाक समझौता व्यापक आर्थिक सहयोग की एक लंबी श्रृंखला का हिस्सा है। दोनों देश यूरेशियन आर्थिक संघ (ईएईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर काम कर रहे हैं। दिसंबर 2025 के संयुक्त वक्तव्य में दोनों पक्षों ने राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग के माध्यम से द्विपक्षीय निपटान प्रणालियों को संयुक्त रूप से विकसित करना जारी रखने पर सहमति व्यक्त की थी।

परिवहन और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ रहा है। दोनों देश अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC), चेन्नई-व्लादिवोस्तोक (पूर्वी समुद्री) गलियारा और उत्तरी समुद्री मार्ग जैसे स्थिर और कुशल परिवहन गलियारों के निर्माण में सहयोग को गहरा करने पर सहमत हुए हैं।

रूस, स्वास्थ्य एवं कल्याण संबंधी वस्तुओं, परिधान, आभूषण, गृह सज्जा और अन्य क्षेत्रों सहित भारतीय उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण एवं विस्तारित बाजार के रूप में उभर रहा है। इस नई डाक सेवा के माध्यम से इन क्षेत्रों में व्यापार को और गति मिलने की संभावना है।

डाक समझौते पर हस्ताक्षर द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करने, डिजिटल वाणिज्य को बढ़ावा देने और डाक एवं लॉजिस्टिक्स सेवाओं में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भारत और रूस की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कदम न केवल औपचारिक व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि जन-जन के बीच संबंधों को भी मजबूत करेगा, जो दोनों देशों की “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” का एक मूलभूत स्तंभ है।

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Author: ainewsworld

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