पुतिन का भारत दौरा: रक्षा समझौतों और ऊर्जा साझेदारी पर केंद्रित होगी ‘मोदी-पुतिन वार्ता’

रूस के साथ रिश्ते मजबूत करने पहुंचे पुतिन, पीएम मोदी ने किया गर्मजोशी से स्वागत

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत की महत्वपूर्ण यात्रा पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से एयरपोर्ट पर जाकर रूसी राष्ट्रपति का स्वागत किया। यह पुतिन का कोविड-19 महामारी के बाद पहला भारत दौरा माना जा रहा है और इस पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हैं।

क्या होंगे एजेंडे के प्रमुख मुद्दे?

इस द्विपक्षीय वार्ता के केंद्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। पुतिन के साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जिसमें रूस के बड़े सरकारी बैंक, रक्षा निर्यातक कंपनी और प्रमुख तेल कंपनियों के प्रमुख शामिल हैं। इससे साफ जाहिर है कि यह दौरा सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि ठोस आर्थिक एवं रणनीतिक समझौतों की नींव रखने के उद्देश्य से है।

रक्षा सहयोग: भारत और रूस के बीच दशकों पुराने रक्षा संबंधों को नई ऊर्जा देने पर जोर रहने की उम्मीद है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रक्षा शक्ति (डिफेंस पावर) बन गया है। नई दिल्ली अपने रक्षा उपकरणों के स्रोतों में विविधता लाना चाहती है, साथ ही रूस के साथ मौजूदा सैन्य तकनीक साझेदारी को भी आगे बढ़ाना चाहती है।

ऊर्जा सुरक्षा: दूसरा प्रमुख मुद्दा ऊर्जा, विशेष रूप से रूसी तेल का है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस भारत को रियायती दरों पर तेल की आपूर्ति जारी रखना चाहता है, जबकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और आयात लागत को कम करने के लिए इसे एक आकर्षक विकल्प मानता है।

हालांकि, इस मामले में भारत को एक नाजुक संतुलन बनाना होगा। अमेरिका ने रूसी तेल पर भारी टैक्स लगाया है और भारत पर इसे खरीदने के लिए दबाव डाला है। रूस के साथ बहुत ज्यादा नजदीकी, भारत-अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता पर असर डाल सकती है। वाणिज्य सचिव ने हाल ही में कहा था कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते के “करीब” पहुंच गए हैं।

विश्लेषण: भारत की विकसित होती कूटनीति

पुतिन की यह यात्रा भारत की ‘मल्टी-एलाइनमेंट’ (बहुपक्षीय संरेखण) कूटनीति की परिपक्वता को दर्शाती है। भारत अब किसी एक महाशक्ति के गुट में बंधकर नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए सभी देशों के साथ संबंध विकसित कर रहा है।

· रूस के साथ: ऐतिहासिक रक्षा साझेदारी, ऊर्जा सुरक्षा और यूरेशिया क्षेत्र में सहयोग प्रमुख हैं।
· अमेरिका और पश्चिम के साथ: प्रौद्योगिकी, व्यापार, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी पर ध्यान केंद्रित है।

इस यात्रा का परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत इन दोनों महत्वपूर्ण संबंधों के बीच कितना प्रभावी संतुलन बना पाता है। पुतिन के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी को वह रास्ता ढूंढना होगा, जिससे रूस के साथ लाभकारी समझौते तो हों, लेकिन पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका के साथ रिश्तों पर भी विपरीत असर न पड़े।

क्या कहते हैं आंकड़े?

इस दौरे की पृष्ठभूमि में भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत एक महत्वपूर्ण पहलू है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने हाल ही में भारत की वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.4% कर दिया है। इसका कारण मजबूत उपभोक्ता खर्च और बेहतर व्यावसायिक माहौल बताया गया है। एक मजबूत अर्थव्यवस्था किसी भी देश की कूटनीतिक सौदेबाजी की ताकत बढ़ाती है।

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Author: ainewsworld

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