डिजिटल इंडिया का बड़ा कदम: अब 2.18 लाख ग्राम पंचायतें हाई-स्पीड इंटरनेट से जुड़ीं, ई-ग्रामस्वराज से बदलेगा गांवों का चेहरा

 

ग्रामीण भारत में डिजिटल क्रांति की बुनियाद मज़बूत हो रही है। भारतनेट परियोजना के तहत देश की 2.18 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड सेवा के लिए तैयार किया जा चुका है, जो ई-गवर्नेंस की नई उड़ान का आधार बनेगा।

देश के हर कोने तक डिजिटल सुविधाएं पहुंचाने और ग्रामीण भारत को डिजिटल इंडिया से जोड़ने की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतनेट परियोजना के तहत अब तक 2.18 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट से जोड़ा जा चुका है। यह दुनिया की सबसे बड़ी ग्रामीण दूरसंचार परियोजनाओं में से एक है, जिसका लक्ष्य देश के लगभग सभी 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ना है।

इस डिजिटल बुनियादी ढांचे पर ही पंचायती राज मंत्रालय के ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना और ई-ग्रामस्वराज पोर्टल जैसी सेवाएं टिकी हुई हैं, जिनका उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर योजना बनाने, बजट तैयार करने और लेखा व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना है।

परियोजना की वर्तमान प्रगति: कहां पहुंचा काम ?

भारतनेट परियोजना ने ग्रामीण कनेक्टिविटी के मोर्चे पर ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की है। मार्च 2025 तक के आंकड़े परियोजना के पैमाने और गति को दर्शाते हैं।

मुख्य उपलब्धियां (मार्च 2025 तक):

· ग्राम पंचायतें जुड़ीं: 2.18 लाख+ (कुल लक्ष्य ~2.5 लाख)
· ऑप्टिकल फाइबर लंबाई: 42.13 लाख रूट किलोमीटर से अधिक
· फाइबर-टू-द-होम (FTTH) कनेक्शन: 12.21 लाख+ सक्रिय
· वाई-फाई हॉटस्पॉट: 1.04 लाख+ स्थापित

जून 2025 तक के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि 2,14,325 ग्राम पंचायतों को जोड़ा जा चुका है और 6,93,303 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है।

भारतनेट परियोजना: एक नजर में

शुरुआत और उद्देश्य
भारतनेट परियोजना,जिसे मूल रूप से राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (NOFN) के नाम से अक्टूबर 2011 में शुरू किया गया था, का प्राथमिक उद्देश्य सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी तक पहुंच प्रदान करना है। इसका लक्ष्य ग्रामीण भारत में ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षा और ई-गवर्नेंस जैसी सेवाओं को सक्षम बनाना है।

कार्यान्वयन के चरण

· चरण I (दिसंबर 2017 तक पूरा): मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग करके 1 लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया।
· चरण II (वर्तमान में जारी): ऑप्टिकल फाइबर, रेडियो और सैटेलाइट तकनीकों के मिश्रण का उपयोग करके अतिरिक्त 1.5 लाख ग्राम पंचायतों तक कवरेज का विस्तार।
· चरण III (वर्तमान में जारी): 5G तकनीकों को एकीकृत करने, बैंडविड्थ बढ़ाने और अंतिम-मील कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर ध्यान।

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम
अगस्त 2023 मेंकैबिनेट ने संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (ABP) को मंजूरी दी, जिस पर 1.39 लाख करोड़ रुपये की लागत आंकी गई है। इसका लक्ष्य रिंग टोपोलॉजी वाले नेटवर्क डिजाइन में 2.64 लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी प्रदान करना है।

ई-पंचायत और ई-ग्रामस्वराज: डिजिटल गवर्नेंस का आधार

भारतनेट द्वारा प्रदान किए गए डिजिटल बुनियादी ढांचे पर ही पंचायती राज मंत्रालय की ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना टिकी हुई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पंचायतों के कामकाज को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना है।

ई-ग्रामस्वराज इसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है – यह एक ऑनलाइन एप्लीकेशन है जिसे योजना बनाने, बजट तैयार करने और लेखा व्यवस्था जैसी पंचायती गतिविधियों को सरल बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। मंत्रालय ने ग्राम पंचायतों के लिए विक्रेताओं/सेवा प्रदाताओं को ऑनलाइन भुगतान करने हेतु ई-ग्रामस्वराज को सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के साथ भी एकीकृत किया है।

कार्यान्वयन की रणनीति और चुनौतियां

बहु-मॉडल दृष्टिकोण
भारतनेट परियोजनाको कार्यान्वित करने के लिए विभिन्न मॉडल अपनाए गए हैं:

· राज्य-नेतृत्व वाला मॉडल: 8 राज्यों में लागू
· सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (CPSU) मॉडल: 4 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में
· निजी क्षेत्र का मॉडल

मुख्य चुनौतियां
हालांकिपरियोजना ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी रही हैं:

· कुछ क्षेत्रों में धीमी प्रगति और कार्यान्वयन में देरी
· चुनौतीपूर्ण भू-भाग में बुनियादी ढांचा विकसित करने की कठिनाई
· अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना

समग्र डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र

भारतनेट और ई-पंचायत, डिजिटल इंडिया के व्यापक दृष्टिकोण के हिस्से हैं, जिसे अन्य पहलों के साथ मिलाकर कार्यान्वित किया जा रहा है:

समानांतर डिजिटल पहल:

· प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA): 31 मार्च 2024 तक 6.39 करोड़ से अधिक ग्रामीण नागरिकों को डिजिटल प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
· राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन (NBM): जनवरी 2025 में NBM 2.0 लॉन्च किया गया।
· CSC ई-गवर्नेंस सेवाएं: ग्राम पंचायतों में सेवा वितरण के लिए एक सहयोगी ढांचा।

भविष्य की राह और समयसीमा

दूरसंचार विभाग के अनुसार, भारतनेट परियोजना के पूरा होने की समय-सीमा मार्च 2027 निर्धारित की गई है। संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत, भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) को पूरे नेटवर्क के संचालन और रखरखाव के लिए एकल परियोजना प्रबंधन एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है।

वहीं, ई-पंचायत एमएमपी के संदर्भ में, सभी राज्य अपने उपलब्ध संसाधनों के आधार पर इसे लागू करने के प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, देश भर में पंचायतों की तैयारी के स्तर में अंतर के कारण, राज्य इन अनुप्रयोगों को लागू करने के विभिन्न चरणों में हैं।

तुलनात्मक दृष्टिकोण: तब और अब

2011 में परियोजना की शुरुआत के समय:

· लक्ष्य: 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोड़ना
· दृष्टिकोण: मुख्यतः भूमिगत ऑप्टिकल फाइबर पर निर्भर
· चुनौती: व्यापक ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी ढांचा विकसित करना

वर्तमान स्थिति (2025):

· उपलब्धि: 2.18 लाख+ GP कनेक्टेड (लक्ष्य का 87% से अधिक)
· तकनीक: ऑप्टिकल फाइबर, रेडियो, सैटेलाइट का मिश्रण
· विस्तार: FTTH कनेक्शन, वाई-फाई हॉटस्पॉट के माध्यम से अंतिम-मील कनेक्टिविटी

डिजिटल इंडिया की नींव मजबूत

भारतनेट और ई-पंचायत की संयुक्त पहल ग्रामीण भारत के डिजिटल परिवर्तन की नींव रख रही है। 2.18 लाख ग्राम पंचायतों का ब्रॉडबैंड से जुड़ना न केवल एक संख्या गत उपलब्धि है, बल्कि करोड़ों ग्रामीण भारतीयों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का वाहक है।

जैसे-जैसे मार्च 2027 तक शेष ग्राम पंचायतों को जोड़ने का कार्य पूरा होगा और ई-ग्रामस्वराज जैसे पोर्टलों का उपयोग बढ़ेगा, वैसे-वैसे ग्रामीण शासन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। यह डिजिटल डिवाइड को पाटने और समावेशी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

 

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Author: ainewsworld

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