प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को गीता जयंती की दी शुभकामनाएं, कहा- ‘दिव्य ग्रंथ हर पीढ़ी को निष्काम कर्म के लिए प्रेरित करेगा’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीमद्भगवद्गीता के अवतरण के पावन दिवस ‘गीता जयंती’ पर देशभर के नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने इस दिव्य ग्रंथ के भारतीय जीवन में सदियों से निभाई गई भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके दिव्य श्लोक हर पीढ़ी को कर्तव्य-पालन एवं निष्काम कर्म के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने लिखा, “देशभर के मेरे परिवारजनों को श्रीमद्भगवद्गीता के अवतरण से जुड़े पावन दिवस ‘गीता जयंती’ की ढेर सारी शुभकामनाएं।”

उन्होंने आगे कहा, “कर्तव्य-पालन के अनमोल संदेशों से सुशोभित इस दिव्य ग्रंथ का भारतीय पारिवारिक, सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन में अत्यंत विशिष्ट स्थान रहा है। इसके दिव्य श्लोक हर पीढ़ी को निष्काम कर्म के लिए प्रेरित करते रहेंगे। जय श्री कृष्ण!”

गीता का दर्शन: कर्तव्य और धर्म का मार्गदर्शक

प्रधानमंत्री के संदेश ने गीता के सार्वभौमिक और कालजयी संदेशों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। श्रीमद्भगवद्गीता, जिसे अक्सर जीवन के लिए एक पूर्ण मार्गदर्शक माना जाता है, ने न केवल आध्यात्मिक क्षेत्र बल्कि जीवन के प्रबंधन और नैतिक नेतृत्व के सिद्धांतों को भी प्रभावित किया है। इसके ‘निष्काम कर्म’ का दर्शन व्यक्ति को फल की चिंता किए बिना अपना कर्तव्य निभाने की प्रेरणा देता है।

सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक प्रासंगिकता

गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन मनाई जाती है, जिस दिन भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को ज्ञान का उपदेश दिया था। प्रधानमंत्री मोदी के संदेश ने इस पवित्र ग्रंथ की आधुनिक समय में भी प्रासंगिकता को रेखांकित किया है। भारतीय संस्कृति, दर्शन और नैतिक मूल्यों की नींव में गीता के योगदान को अक्सर रेखांकित किया जाता रहा है।

गीता जयंती के अवसर पर देशभर में धार्मिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन, गीता पाठ और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के इस शुभकामना संदेश ने इस पावन पर्व के महत्व को और अधिक राष्ट्रीय फलक पर प्रसारित कर दिया है।

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Author: ainewsworld

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