वोटर लिस्ट पुनरीक्षण: राजस्थान में एसआईआर की हकीकत, 2002 की सूची में ढूंढ रहे लोग अपने पूर्वज

 

स्कूल में बच्चे शिक्षकों को, शिक्षक गांव में मतदाताओं को, और मतदाता 2002 की वोटर लिस्ट में अपने पूर्वज को ढूंढ रहे हैं।

राजस्थान में इन दिनों मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम चल रहा है। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी अपडेट कर रहे हैं। प्रक्रिया के तहत 2002 की मतदाता सूची के आधार पर पारिवारिक लिंकिंग का काम चल रहा है, जिसके चलते कई मतदाता दशकों पुरानी सूचियों में अपने पूर्वजों के नाम तलाश रहे हैं।

राज्य में 4 नवंबर से शुरू हुए इस अभियान ने एक नई सामाजिक-प्रशासनिक गतिविधि का संचार किया है। सोशल मीडिया पर इस प्रक्रिया पर कटाक्ष भी किया जा रहा है, जबकि चुनाव आयोग का दावा है कि यह मतदाता सूची को और अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

क्या है एसआईआर अभियान?

विशेष गहन पुनरीक्षण

(एसआईआर) भारत निर्वाचन आयोग की एक पहल है, जिसे 23 साल बाद शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर करना, फर्जी नामों को हटाना और सभी पात्र मतदाताओं का पंजीकरण सुनिश्चित करना है।

इस बार का अभियान पूरी तरह से डिजिटल और पारिवारिक लिंकिंग सिस्टम पर आधारित है। अगर किसी मतदाता के माता-पिता या दादा-दादी पहले से मतदाता सूची में दर्ज हैं, तो उसकी पहचान आसानी से सत्यापित की जा सकती है।

अभियान की प्रमुख तिथियाँ

तिथियाँ कार्यक्रम

28 अक्टूबर – 3 नवंबर 2025 प्रशिक्षण एवं गणना प्रपत्र तैयारी

4 नवंबर – 4 दिसंबर 2025 घर-घर सर्वेक्षण व प्रपत्र वितरण

9 दिसंबर 2025 ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशन

9 दिसंबर 2025 – 8 जनवरी 2026 दावे और आपत्तियाँ

9 दिसंबर – 31 जनवरी 2026 सुनवाई और सत्यापन

7 फरवरी 2026 अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन

क्यों महत्वपूर्ण है 2002 की मतदाता सूची?

इस अभियान की सबसे रोचक बात यह है कि इसमें 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाया जा रहा है। चुनाव आयोग ने इस सूची को ऑनलाइन उपलब्ध कराया है, जहाँ मतदाता अपना या अपने परिवार के सदस्यों का नाम देख सकते हैं।

विभाग के अधिकारियों के अनुसार, “विगत एसआईआर की मतदाता सूची में अगर किसी वर्तमान मतदाता के माता-पिता/दादा-दादी आदि का नाम शामिल है तो सटीक और सत्यापित पारिवारिक संबंध के माध्यम से वंशावली मानचित्रण (मैपिंग) की जा रही है।”

इस पद्धति से एक बड़ा फायदा यह हुआ है कि अधिकांश मतदाताओं से किसी भी प्रकार के दस्तावेज लेने की आवश्यकता नहीं पड़ रही। बस एक पासपोर्ट साइज फोटो और फॉर्म-6 के माध्यम से नया नाम आसानी से जोड़ा जा सकता है।

अब तक की प्रगति

राजस्थान में इस अभियान को अभूतपूर्व सफलता मिल रही है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन के अनुसार, महज 16 दिनों में ही 2.37 करोड़ गणना प्रपत्र ईसीआईनेट पर अपलोड किए जा चुके हैं.

· प्रदेश के 78 BLOs ने 19 नवंबर तक शत-प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया है, जिन्हें जल्द ही सम्मानित किया जाएगा。
· 77% से अधिक 40 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है。
· बाड़मेर 58% डिजिटलाइजेशन के साथ शीर्ष पर है, जबकि सलूंबर, सवाई माधोपुर, धौलपुर, फलोदी, झालावाड़ और भरतपुर 50% से अधिक अपलोडिंग के साथ अग्रणी जिलों में शामिल हैं.

विवाद और आरोप-प्रत्यारोप

हालाँकि, यह अभियान विवादों से भी अछूता नहीं रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि “बीएलओ के बिना घर गए और बिना फॉर्म दिए ही पूरे परिवार को वोटर लिस्ट से गायब कर दिया जा रहा है।” पार्टी ने इसे ‘संविधान पर हमला’ करार दिया.

इन आरोपों पर जयपुर प्रशासन ने तत्परता से जवाब दिया और स्पष्ट किया कि “अभी तक किसी का भी नाम अंतिम रूप से नहीं काटा गया है और न ही कोई वोटर लिस्ट से बाहर हुआ है। यह केवल प्रारंभिक सर्वेक्षण की प्रक्रिया है।”

प्रशासन ने यह भी बताया कि बीएलओ प्रत्येक मतदाता के घर कम से कम तीन बार जाएंगे। अगर किसी मतदाता का सर्वे के दौरान सामना नहीं हो पाता, तो अभी भी 9 दिसंबर को ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद दावे और आपत्तियाँ दर्ज कराने का मौका मिलेगा.

नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

मतदाताओं की सुविधा के लिए चुनाव आयोग ने कई कदम उठाए हैं:

· वेबसाइट और ऐप: मतदाता भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट voters.eci.gov.in या ‘बुक ए कॉल विद BLO’ फीचर के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं।
· हेल्प डेस्क: प्रशासन ने वृद्ध, दिव्यांग और वंचित वर्ग के मतदाताओं की सुविधा के लिए वॉलिंटियर्स और हेल्पडेस्क स्थापित किए हैं।
· दस्तावेज: आधार कार्ड, पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र आदि दस्तावेज मान्य हैं.

लोकतंत्र का यह महापर्व

यह अभियान सिर्फ मतदाता सूची का पुनरीक्षण नहीं, बल्कि लोकतंत्र के स्वास्थ्य की जांच है。 जिला कलेक्टर उत्सव कौशल के अनुसार, “हर नागरिक की भागीदारी से ही यह सूची सटीक और भरोसेमंद बनेगी।”

जैसे-जैसे यह अभियान आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे मतदाताओं की भागीदारी और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी। 7 फरवरी 2026 को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची ही इस अभियान की सफलता का असली मापदंड होगी।

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Author: ainewsworld

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