
आंकड़ों के गणित को देखते हुए राजग उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन की जीत लगभग निश्चित मानी जा रही है। विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है और कुछ अनिर्धारित मतों के राजग के पक्ष में जाने की संभावना से उनकी जीत और पुख्ता हो गई है। हालांकि, उपराष्ट्रपति चुनाव में व्हिप लागू नहीं होने के कारण क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन फिलहाल राजग का पलड़ा भारी दिख रहा है .
इस चुनाव के नतीजे से भाजपा की ‘मिशन दक्षिण’ रणनीति को भी बल मिलेगा, क्योंकि सीपी राधाकृष्णन मूल रूप से तमिलनाडु से हैं और अगले साल होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है। साथ ही, संघ और भाजपा के समर्थक वर्ग के लिए भी यह एक संतोषजनक फैसला है, क्योंकि राधाकृष्णन संघ के स्वयंसेवक रहे हैं .
मतदान के बाद मंगलवार शाम तक नतीजे का ऐलान हो जाएगा और देश को अपना नया उपराष्ट्रपति मिल जाएगा। इस चुनाव में जिसे भी जीत मिले, उसे सभी दलों का समर्थन मिलना चाहिए, क्योंकि उपराष्ट्रपति का पद दलगत राजनीति से ऊपर होता है और उन्हें संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन निष्पक्ष रूप से करना होता है।
Author: ainewsworld