लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा: “संविधान की आत्मा मानव गरिमा है, यही भारत को महानतम लोकतंत्र बनाती है”

नई दिल्ली : लोकसभा अध्यक्ष माननीय श्री ओम बिरला ने आज कहा कि भारत का संविधान, जिसकी आत्मा मानव गरिमा है, देश को दुनिया का सबसे महान लोकतंत्र बनाता है और प्रत्येक नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता और समानता के साथ गरिमामय जीवन प्रदान करता है।

श्री बिरला नई दिल्ली स्थित डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 11वें डॉ. एल. एम. सिंघवी स्मृति व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने “संविधान की आत्मा के रूप में मानव गरिमा : 21वीं शताब्दी में न्यायिक प्रतिबिंब” विषय पर अपने विचार साझा किए।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, “संविधान की आत्मा मानव गरिमा है। बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और हमारे संविधान निर्माताओं ने प्रत्येक नागरिक के अधिकार, स्वतंत्रता और समानता की रक्षा सुनिश्चित की है। यही आदर्श भारत को विश्व का महानतम लोकतंत्र बनाते हैं और हर भारतीय को न्याय, स्वतंत्रता व समानता के साथ गरिमामयी जीवन देते हैं।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि आज सामूहिक संवाद और चिंतन की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि न्याय सहज, सुलभ और त्वरित रूप से प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे। श्री बिरला ने कहा, “यही प्रयास हमें एक समावेशी, प्रगतिशील और समतामूलक समाज की ओर ले जाएगा और विकसित भारत के निर्माण में हमारी सामूहिक भूमिका तय करेगा।”

इस कार्यक्रम में विभिन्न विधिवेत्ताओं, न्यायविदों, विद्वानों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। यह व्याख्यान देश के पूर्व उच्चायुक्त और प्रख्यात विधिवेत्ता स्वर्गीय डॉ. एल. एम. सिंघवी की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जो मानवाधिकारों और संवैधानिक मूल्यों के प्रति गहरे प्रतिबद्ध थे।

श्री बिरला के इस वक्तव्य को संविधान में निहित मूलभूत मूल्यों की पुष्टि और 21वीं सदी की चुनौतियों के बीच न्यायिक व्यवस्था की भूमिका पर एक महत्वपूर्ण बयान के रूप में देखा जा रहा है।

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Author: ainewsworld

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