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भारत सरकार एवं एशियाई विकास बैंक ने अहमदाबाद में रहने योग्य स्थिति और आवागमन में सुधार के लिए 181 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए

भारत सरकार एवं एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने आज गुजरात के अहमदाबाद शहर के उपनगरीय क्षेत्रों में रहने योग्य स्थिति और आवागमन (मोबिलिटी) में सुधार की दिशा में गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे और सेवाओं के निर्माण के लिए 181 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए।

अहमदाबाद पेरी-अर्बन लिवेबिलिटी इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट के लिए ऋण समझौते पर भारत सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग की संयुक्त सचिव सुश्री जूही मुखर्जी और एशियाई विकास बैंक की ओर से एडीबी के भारत रेजिडेंट मिशन के प्रभारी अधिकारी श्री राजेश वासुदेवन ने हस्ताक्षर किए।

ऋण समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद, सुश्री मुखर्जी ने कहा कि इस परियोजना का लक्ष्य अहमदाबाद के उपनगरीय क्षेत्रों को रहने योग्य,पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ, मजबूत भौतिक व सामाजिक बुनियादी ढांचे तथा सशक्त अर्थव्यवस्था से लैस और एक पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में एक विशिष्ट पहचान के साथ कुशल बनाना है।

श्री वासुदेवन ने कहा “अहमदाबाद का निरंतर विस्तार एक आर्थिक विकास केंद्र के रूप में एक अवसर प्रस्तुत करता है। वहीं इससे जुड़ी हुई चुनौती, शहर के शहरी विस्तार, विशेष रूप से उपनगरीय क्षेत्रों में बेहतर प्रबंधन करना है। इस परियोजना के प्रयासों का उद्देश्य शहर के परिधीय (पेरिफेरल) क्षेत्रों में बसी व्यापक प्रवासी आबादी के लिए गुणवत्तापूर्ण शहरी सेवाओं और परिवहन कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ इस चुनौती का समाधान करना है।”

इस परियोजना से शहरी गरीबों, महिलाओं और प्रवासी श्रमिकों को बेहतर शहरी सेवाओं और शहरी प्रशासन के माध्यम से लाभ होगा। यह 166 किलोमीटर लंबे जल वितरण के नेटवर्क, 126 किलोमीटर लंबे जलवायु-अनुकूल स्ट्रॉम वाटर निकासी, 300 किलोमीटर लंबे सीवरेज सिस्टम और चार सीवेज शोधन संयंत्रों का निर्माण करेगी। यह परियोजना अहमदाबाद शहर के उपनगरीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में सुधार के लिए मौजूदा सरदार पटेल रिंग रोड के साथ 10 जंक्शन सुधारों के लिए भी सहायता प्रदान कर रही है।

एडीबी प्रौद्योगिकी आधारित शहरी नियोजन में अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण और शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता को मजबूत करने में मदद करेगा, जिसमें जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा शामिल है जो पर्यावरण एवं सामाजिक सुरक्षा उपायों, लैंगिक समानता और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देता है। यह परियोजना भूमि विकास योजनाओं और नगर नियोजन योजनाओं को सहायता प्रदान करेगी जो इन तत्वों को एकीकृत करती हैं जिन्हें अन्य राज्यों द्वारा समूहीकरण के माध्यम से अधिक नियोजित शहरी विकास एवं घनत्व को बढ़ाने के लिए दोहराया जा सकता है।

यह परियोजना वित्तीय योजना, राजस्व वृद्धि और बुनियादी ढांचागत परिसंपत्ति संचालन में सरकारी एजेंसियों की क्षमता का भी निर्माण करेगी। जल संरक्षण, स्वास्थ्य और स्वच्छता को प्रोत्साहित करने के लिए समुदायों में जागरूकता बढ़ाने वाली गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। महिला स्वयं सहायता समूहों को जल आपूर्ति कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। यह परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से औद्योगिक उपयोग के लिए शोधित सीवेज के पुनर्चक्रण के विकास का समर्थन करेगी।

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Author: ainewsworld

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