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शहरीकरण को 21वीं सदी के महत्वपूर्ण रुझानों में से एक के रूप में रेखांकित करते हुए, आवास और शहरी कार्य तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि 2050 तक दुनिया की दो-तिहाई आबादी शहरों में निवास करेगी। उन्होंने कहा, “विभिन्न वैश्विक लक्ष्यों, विशेष रूप से सतत विकास और जलवायु सहनीयता से संबंधित लक्ष्यों को प्राप्त करने में शहर केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।” आज मिरांडा हाउस में शहरी अध्ययन और अनुसंधान केंद्र के शुभारंभ के अवसर पर उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, भारत की 50% से अधिक आबादी, या 877 मिलियन लोग, 2050 तक हमारे नगरों और शहरों में रहेंगे। उन्होंने कहा, उस समय तक, भारतीय शहर हमारे सकल घरेलू उत्पाद में 75 प्रतिशत से अधिक और हमारे जीएचजी उत्सर्जन में लगभग 60 प्रतिशत का योगदान देंगे।

आयोजन के दौरान, मंत्री ने भारत की शहरी विकास यात्रा के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस बारे में बात की कि कैसे देश अनिच्छुक शहरीकरण करने वाले से तीव्र शहरीकरण करने वाले में बदल गया है। उन्होंने कहा कि शहरी कायाकल्प के लिए सरकार की व्यापक पहल, देश के लिए एक नई शहरी कथा को आकार देने में सहायक रही है।

श्री पुरी ने कहा कि सरकार ने शहरी विकास को चुनौती के बजाय अवसर माना है। उन्होंने कहा, “2014 से पहले शहरी विकास की उपेक्षा की गयी। 2004 से 2014 के बीच शहरी इलाकों में केवल 1.78 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ। लेकिन 2014 के बाद से हमारे नगरों और शहरों के बदलाव के लिए 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है।”

मंत्री ने सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं के बारे में चर्चा की, जो देश में शहरी विकास परिदृश्य को बदल रही हैं। उन्होंने हाल के वर्षों में शहरी विकास में पीएमएवाई (शहरी), स्वच्छ भारत मिशन – शहरी, अमृत, स्मार्ट सिटीज मिशन और पीएम स्वनिधि मिशन जैसी योजनाओं की भूमिका का उल्लेख किया।

विकेंद्रीकरण, हस्तांतरण और सशक्तिकरण पर सरकार के बढ़ते विशेष ध्यान पर प्रकाश डालते हुए, श्री पुरी ने कहा कि सरकार ने हाल के वर्षों में शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि 1992-1993 में 74वां संशोधन अधिनियम पारित होने के बाद पहली बार, हमारे यूएलबी वित्तीय संसाधनों और क्षमता निर्माण तक पहुंच, बड़े पैमाने के मिशनों को पूरा करने और जोखिम लेने तक के लिए सशक्त हुए हैं। उन्होंने कहा, 13वें वित्त आयोग ने 2010-11 से 2014-2015 की अवधि के बीच यूएलबी को 23,111 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी; जबकि 15वें वित्त आयोग के तहत 2021-22 से 2025-2026 के बीच यह राशि छह गुना बढ़कर 1,55,628 करोड़ रुपये हो गयी है।

जलवायु परिवर्तन से लेकर शहरी सुदृढ़ता, शहरी वित्त तक पहुंच और कुशल भूमि उपयोग तक – शहरी क्षेत्रों के सामने आने वाली नई चुनौतियों के संदर्भ में, मंत्री ने कहा कि 21वीं सदी की समस्याओं के लिए 21वीं सदी के समाधान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार शहरी विकास में नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि डेटा और प्रौद्योगिकी की शक्ति का उपयोग करके शहरों की जीवित प्रयोगशालाओं के रूप में परिकल्पना की जा रही है।

श्री पुरी ने कहा कि मिरांडा हाउस में नए लॉन्च किए गए शहरी अध्ययन और अनुसंधान केंद्र में, हमारे शहरों को जिस तरह के परिवर्तनकारी बदलाव की आवश्यकता है, उस पर एक नई चर्चा शुरू करने की क्षमता है। उन्होंने कामना की कि केंद्र शहरी अर्थशास्त्र से जुड़े बहु-आयामी विषय के लिए एक अग्रणी आवाज बने। उन्होंने कहा, कुशल शहरों को डिजाइन करने के लिए शहर के आर्थिक आधार और उसकी बाधाओं के साथ-साथ उसके प्रतिस्पर्धी लाभ को समझना आवश्यक है।

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Author: ainewsworld

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