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पीएम गतिशक्ति के तहत ‘नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप’ की 66वीं बैठक में पांच बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया

तीन परियोजनाओं के मूल्यांकन के लिए उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अपर सचिव, श्री राजीव सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में 27 फरवरी, 2024 को नई दिल्ली में नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) की 66 वीं बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की तीन और रेल मंत्रालय की दो परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया।

आंध्र प्रदेशमध्य प्रदेशमेघालय और असम की राजमार्ग परियोजनाएं

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की पहली परियोजना आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग 216एचके उन्नयन से संबंधित है। यह ब्राउनफील्ड परियोजना लगभग 120.85 किलोमीटर लंबी है, जो पेडाना को लक्ष्मीपुरम से जोड़ती है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से मछलीपट्टनम बंदरगाह और गुडीवियाडा तथा मछलीपट्टनम रेलवे स्टेशन के लिए इंटरकनेक्टिविटी को बढ़ाना है। इस परियोजना का ध्येय राज्य में तेज कनेक्टिविटी प्रदान करना है, जिससे अविकसित क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और इंटर-सिटी यात्रा के लिए समय और लागत में बचत होगी।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की दूसरी परियोजना इंदौर शहर के चारों ओर एक बाईपास उपलब्ध कराने से संबंधित है। यह परियोजना मध्य प्रदेश के धार, इंदौर और देवास जिलों से गुजरने वाली 141 किलोमीटर लंबी एक ग्रीनफील्ड परियोजना है। खंडवा गांव के पास से शुरू होकर भरदाला के पास एनएच-52 पर समाप्त होने वाले इस कॉरिडोर का उद्देश्य इंदौर में यातायात की भीड़ को कम करना, एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध  कराना तथा माल और लोगों के लिए सुगम परिवहन सुनिश्चित कराना है।

तीसरी परियोजना गुवाहाटी शहर के चारों ओर लगभग 64 किलोमीटर लंबी रिंग रोड के निर्माण से संबंधित है। इस प्रस्ताव में जोराबाट में एक ऊंचा ढांचा और ब्रह्मपुत्र नदी पर एक नए पुल का निर्माण शामिल है। यह परियोजना गुवाहाटी शहर और कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के प्रमुख जंक्शनों पर होने वाली भीड़भाड़ को कम करने में योगदान देगी, जिसके फलस्वरूप यात्रा में लगने वाले समय और वाहन संचालन लागत में कमी होने के साथ-साथ, भीड़भाड़ का समाधान निकलेगा और कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इस परियोजना से समग्र आर्थिक विकास में योगदान मिलने के अलावा सुचारू यातायात प्रवाह मिलने की उम्मीद है।

महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बीच नई ब्रॉड गेज (बीजी) लाइन और उत्तर प्रदेश में लाइन का दोहरीकरण

नई ब्रॉड गेज लाइन परियोजना एक ग्रीनफील्ड पहल के रूप में सामने आ रही है, जो महाराष्ट्र (नासिक और धुले जिले) और मध्य प्रदेश (बडवानी, खरगोन, धार, इंदौर जिले) में 309 किमी की दूरी तय करेगी। यह मनमाड और डॉ. अंबेडकर नगर (महू) के मौजूदा रेलवे हेड स्टेशनों को परस्पर जोड़ती है। नया रेल लिंक मुंबई से इंदौर तक सीधा मार्ग खोलने के लिए तैयार है, जिससे महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के पिछड़े जिलों में बेहतर कनेक्टिविटी और सामाजिक-आर्थिक प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।

उत्तर प्रदेश की फाफामऊ-ऊंचाहार रेलवे लाइन की दोहरीकरण परियोजना इलाहाबाद, प्रतापगढ़ और रायबरेली जिले में 72.27 किमी की दूरी तय करेगी। इस ब्राउनफील्ड परियोजना का उद्देश्य कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना, यात्रा के समय को कम करना और परिचालन दक्षता को बढ़ाना है।

इस बैठक में संबंधित बुनियादी ढांचा मंत्रालयों के नेटवर्क नियोजन विंग के प्रमुख एनपीजी सदस्यों ने भाग लिया। उन्होंने पीएम गतिशक्ति के सिद्धांतों और समग्र क्षेत्रीय सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए क्षेत्र विकास दृष्टिकोण के आधार पर एकीकृत योजना के परिप्रेक्ष्य से परियोजनाओं पर चर्चा की। उपस्थित लोगों में बुनियादी ढांचा मंत्रालयों के अधिकारियों सहित उन राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जहां ये परियोजनाएं लागू की जाएंगी।

इस बैठक में पीएम गतिशक्ति एनएमपी पर योजना/मैपिंग के आधार पर परियोजना विवरण की जांच की गई। इस मूल्यांकन प्रक्रिया के मुख्य परिणामों पर विभिन्न आर्थिक/सामाजिक नोड्स के साथ कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से चर्चा की गई, ताकि पहली और अंतिम मील कनेक्टिविटी और संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण के परिप्रेक्ष्य में मल्टी-मॉडल बुनियादी ढांचे को सुनिश्चित किया जा सके।

एनपीजी ने राष्ट्र निर्माण में इन परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया, क्योंकि ये परियोजनाएं विभिन्न तरीकों को एकीकृत करती हैं तथा महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक लाभ प्रदान करने के साथ-साथ संबंधित क्षेत्रों के व्यापक विकास में योगदान देती हैं।

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Author: ainewsworld

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