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अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना के अंतर्गत पारसी समुदाय के प्रतिनिधियों से सफलतापूर्वक बातचीत करने हेतु व्यापक दृष्टिकोण अपनाकर देश में पारसी लोगों की विरासत का सम्मान करने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया

 

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना के अंतर्गत देश में पारसियों की विरासत का सम्मान करने के लिए भारत को परिभाषित करने वाले एकता, विविधता और समावेशिता के लोकाचार का दृष्‍टांत प्रस्‍तुत करते हुए आज दिल्ली पारसी अंजुमन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने की।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य पारसी समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ सफलतापूर्वक बातचीत करने के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाकर पारसी लोगों की विरासत का सम्मान करना था। अपनी उपलब्धियों और योगदान के माध्यम से पारसियों ने वास्तव में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के आदर्शों का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

भारत का सार उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और विभिन्न समुदायों के सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व में निहित है। हमारे देश की अनेकता में एकता का कीर्तिगान करने के प्रति लक्षित एक भारत श्रेष्ठ भारत पहल के अंतर्गत अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने भारत में पारसी समुदाय के योगदान और विरासत को रेखांकित किया। जोरास्ट्रियन, जिन्हें पारसी भी कहा जाता है, का भारत में लंबा और शानदार इतिहास रहा है, जो एक हजार साल से भी अधिक पुराना है।

जैसे कि देश विभिन्न समुदायों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी समझ को बढ़ावा देना जारी रखे हुए है, ऐसे में भारत में पारसी समुदाय की यात्रा से प्रेरणा लेने की जरूरत है, जो लचीलेपन, सहयोजन, अनुकूलनशीलता और उत्कृष्टता का शानदार उदाहरण है।

श्रीजी पाक ईरानशाह अताश बेहराम, उदवाड़ा के महायाजक वडा दस्तूरजी खुर्शीद दस्तूर ने अपनी उपस्थिति से इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई । इस कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री श्री जॉन बारला और देश भर के विभिन्न पारसी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस कार्यक्रम ने देश में सबसे छोटे अल्पसंख्यक समूह के समग्र कल्याण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए प्रभावी कदमों को प्रदर्शित करने के लिए पारसी समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की सुविधा प्रदान की। इस कार्यक्रम के दौरान, प्रमुख जानकारियां साझा की गईं, जिसमें जनसंख्या में गिरावट को रोकने से लेकर लुप्त हो रही भाषाओं को पुनर्जीवित करने तक विभिन्न सहायता सेवाओं पर प्रकाश डाला गया। सामूहिक रूप से, ये कदम अल्पसंख्यक समुदायों को मुख्यधारा में लाने और एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं।

इस कार्यक्रम में मुंबई विश्वविद्यालय में ‘द सेंटर फॉर अवेस्ता-पहलवी स्टडीज’ की स्‍थापना के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। पारसियों की प्राचीन और पवित्र भाषा अवेस्ता – पहलवी, पारसी समुदाय के सदस्यों द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली प्राचीन भाषाओं में से एक है। इस भाषा का उपयोग पारसिक समुदाय के पारसी धर्मग्रंथों में किया गया है, जो अपने अनुयायियों में मानवीय मूल्यों का समावेश करते हैं तथा उन्हें सहिष्णु और समाज के कानून का पालन करने वाला नागरिक बनाते हैं। महान हिंद-ईरानी भाषा परिवारों की एक शाखा होने के नाते अवेस्ता-पहलवी का भारत की प्राचीन भाषा संस्कृत से घनिष्ठ संबंध है।

केवल उच्च शिक्षा के एक विषय के रूप में ही नहीं, बल्कि पारसी जोरास्ट्रियन संस्कृति की शिक्षाओं को संरक्षित करने हेतु इस भाषा को पुनर्जीवित करने की बढ़ती मांग और आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करते हुए, मुंबई विश्वविद्यालय में भाषा के लिए पहले से मौजूद विभाग को ‘द सेंटर फॉर अवेस्ता-पहलवी स्टडीज’ की स्थापना के जरिए 21 वर्षों के बाद पुनर्जीवित और विकसित करते हुए किया जाने वाला अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का यह अद्वितीय प्रयोग और पहल है।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का लक्ष्य मुंबई विश्वविद्यालय के सहयोग से लगभग 11.20 करोड़ रुपये की राशि के साथ प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, डिप्लोमा पाठ्यक्रम और पीएचडी कार्यक्रम शुरू करने के लिए केंद्र और आवश्यक बुनियादी ढांचे की स्थापना करना है।

जियो पारसी योजना के बेहतर दिशानिर्देश भी लॉन्च किए गए। राज्य सरकारों, पारसी संगठनों की भागीदारी के माध्यम से योजना के कार्यान्वयन से समुदाय के बीच बेहतर पहुंच सुगम होगी और पूरे देश में योजना के कवरेज में सुधार होगा। यह योजना प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से लाभार्थियों को वित्तीय लाभ प्रदान करती है।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने विलुप्त हो रही भाषाओं, विशेषकर अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित भाषाओं के पुनरुद्धार के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर श्रीमती ईरानी ने अन्य लुप्तप्राय भाषाओं के पुनरुद्धार पर भी जोर दिया। श्रीमती ईरानी ने जियो पारसी योजना के तहत सहायता के तरीके के बारे में जानकारी दी और पारसी संगठन के प्रतिनिधियों से समुदाय को इस योजना के बारे में जागरूक बनाने का आग्रह किया।

श्रीमती ईरानी ने इस बात पर भी जोर दिया कि युवा पारसियों को जातीय कौशल में प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है और मंत्रालय द्वारा उन्हें वित्तीय सहायता दी जा सकती है और उद्यमिता अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

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Author: ainewsworld

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