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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और जनजातीय मामलों की राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने आग्रह किया कि देश से सिकल सेल रोग को खत्म करने के लिए तेजी से काम करें

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और जनजातीय मामलों की राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने महाराष्ट्र में स्वास्थ्य क्षेत्र की योजनाओं के कार्यान्वयन और प्रगति पर एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। आज मुंबई के सह्याद्री गेस्ट हाउस में आयोजित बैठक में महाराष्ट्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री मिलिंद म्हैस्कर; निदेशक, एनएचएम-III, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) श्री सरोज कुमार, स्वास्थ्य सेवा आयुक्त और एमडी, एनएचएम, जीओएम, श्री धीरज कुमार; चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त श्री राजीव निवतकर, स्वास्थ्य सेवा के अतिरिक्त निदेशक डॉ. नितिन अम्बेडकर और केंद्र और राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे। इस दौरान पीएम-एबीएचआईएम का कार्यान्वयन और प्रगति; सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन; जिला अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी और शहरी पीएचसी के लिए राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) प्रमाणन; आयुष्मान आरोग्य मंदिर; पीएमएसएसवाई; टीबी उन्मूलन कार्यक्रम; पीएमएनडीपी; राज्य में कैंसर देखभाल और आयुष अस्पताल उन योजनाओं और कार्यक्रमों में से थे जिनकी समीक्षा और चर्चा की गई।

इस अवसर पर बोलते हुए राज्य मंत्री (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) डॉ. भारती प्रवीण पवार ने कहा, देश में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के निर्माण और रोगी देखभाल को प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राज्यों को धन दिया जाता है। इन फंडों के आवंटन के जरिए देश में स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त बनाने का काम किया जा रहा है।

राज्य मंत्री (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि आदिवासी क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया के लिए बड़े पैमाने पर जांच बढ़ाई जानी चाहिए। डॉ. भारती पवार ने आग्रह किया कि गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच में सिकल सेल एनीमिया जांच अनिवार्य की जानी चाहिए। मंत्री ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री  श्री नरेन्द्र मोदी ने देश में सिकल सेल रोग को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। मंत्री ने आग्रह किया कि इसके साथ ही तपेदिक उन्मूलन के लिए उपायों को लागू किया जाना चाहिए और अधिक से अधिक नागरिकों को निक्षय मित्र बनने के लिए जन जागरूकता पैदा करके टीबी की जांच के अभियान में शामिल किया जाना चाहिए।

डॉ. भारती पवार ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) योजना के तहत राज्य में चिकित्सा प्रयोगशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। यह सुविधा राज्य के चार जिलों में बनायी गयी है। इसके अलावा, महाराष्ट्र राज्य में पीएम-एबीएचआईएम के तहत 18 क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण किया जा रहा है। महाराष्ट्र में 11 हजार 52 स्वास्थ्य केंद्र हैं जिन्हें अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर में बदल दिया गया है। इन केंद्रों में मधुमेह जांच, तीन प्रकार की कैंसर जांच आदि जैसी नई सुविधाएं होंगी।

राज्य मंत्री (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ देश में चिकित्सा शिक्षा सीटें भी बढ़ाई गई हैं। राज्य में नंदुरबार और गोंदिया में मेडिकल कॉलेज का काम चल रहा है। डॉ. पवार ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) व्यवस्था का उपयोग किया जाना चाहिए क्योंकि यह प्रभावी पाई गई है और उन्होंने यह भी सलाह दी कि कैंसर के निदान और उपचार को बढ़ाने के लिए अधिक कीमोथेरेपी केंद्र खोले जाने चाहिए। मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में कैंसर पर प्रभावी नियंत्रण कार्यक्रम चलाया जाना चाहिए।

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Author: ainewsworld

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