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विज्ञान और प्रौद्योगिकी की दूसरी भारत-फ्रांसीसी संयुक्त समिति (जेसीएसटी) नए सिरे से वैज्ञानिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर रही है

भारत की कामयाबी के नए-नए मार्ग प्रशस्त

आज भारत-फ्रांसीसी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संयुक्त समिति (जेसीएसटी) की दूसरी बैठक में मजबूत और पुनर्जीवित भारत-फ्रांसीसी वैज्ञानिक साझेदारी को सहायता देने के तरीकों पर चर्चा की गई।

समिति की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर और फ्रांसीसी उच्च शिक्षा और अनुसंधान एवं नवाचार मंत्रालय में अनुसंधान और नवाचार के महानिदेशक डॉ. क्लेयर गिरी ने की.

डीएसटी के सचिव प्रोफेसर करंदीकर ने भारत-फ्रांसीसी सहयोग के मुख्य स्रोत के रूप में सीईएफआईपीआरए मॉडल की सफलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह मॉडल आईसीपीएस, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा, एआई, क्वांटम तकनीक और उन्नत सामग्रियों जैसी नई युग की प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान साझेदारी को बढ़ाने में मदद कर सकता है। उन्होंने दोनों देशों के अन्वेषकों एवं उद्यमियों के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

फ्रांसीसी उच्च शिक्षा और अनुसंधान एवं नवाचार मंत्रालय में अनुसंधान व नवाचार के महानिदेशक डॉ. क्लेयर गिरी ने कहा कि स्थायी प्रौद्योगिकियों, अप्लाई मैथेमेटिक्स, स्वास्थ्य और महासागर अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने वाले दोनों देशों के शोधकर्ताओं के बीच मजबूत संबंधों की आवश्यकता है।

बैठक ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (टीएचएसटीआई) के परिसर में आयोजित की गई थी। यहां समिति को इंडिया इंटरनेशनल एंड साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ) के मौके पर बुलाया गया था, जो भारत के प्रमुख वैज्ञानिक सोच संबंधी कार्यक्रमों में से एक है।

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Author: ainewsworld

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